हेल्पर के लिए बुलाकर भारतीयों से रूस में छीना गया पासपोर्ट, जंग लड़ने को किया मजबूर

नई दिल्ली,

यूक्रेन से जंग लड़ रहे रूस से एक भयावह रिपोर्ट सामने आ रही है. रूसी कंपनियों ने जिन भारतीयों को हेल्पर के तौर पर काम करने के लिए हायर किया था, रूस में उन्हें जबरदस्ती यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है. इनमें से ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब और जम्मू कश्मीर के रहने वाले हैं. रूस में फंसे इन सभी लोगों ने भारत सरकार से मदद मांगी है.

अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम तीन भारतीयों को रूस-यूक्रेन सीमा पर रूसी सैनिकों के साथ लड़ने के लिए मजबूर किया गया. पीड़ितों का कहना है कि एक एजेंट ने उन्हें धोखे से सेना सुरक्षा सहायक के रूप में काम करने के लिए रूस भेज दिया.

रिपोर्ट के मुताबिक, एक एजेंट ने यह भी बताया है कि नवंबर 2023 से लगभग 18 भारतीय नागरिक रूस-यूक्रेन सीमा पर फंसे हुए हैं. ये लोग मारियुपोल, खार्किव, डोनात्सक, रोस्तोव-ऑन-डॉन में फंसे हुए हैं. यह भी कहा जा रहा है कि युद्ध के दौरान एक भारतीय नागरिक की मौत भी हो गई है.

रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की मौजूदगी
रूस और यूक्रेन के बीच पिछले दो सालों से जंग जारी है. 2022 में कुछ भारतीय वॉलेंटियर्स ने रूसी सेना से लड़ने के लिए बनाई गई अंतरराष्ट्रीय लीगन में शामिल होने के लिए स्वेच्छा से भाग लिया था. लेकिन रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की मौजूदगी की जानकारी पहली बार सामने आई है.

रूस में फंसा एक भारतीय नागरिक हैदराबाद का रहने वाला है. हैदराबाद से AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और मॉस्को में भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर उसकी वापसी के लिए सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है.

जंग लड़ने को किया गया मजबूर
रूस में फंसे यूपी के एक युवक ने बताया, “12 नवंबर को हमें दो भारतीय एजेंट ने रिसीव किया था. 13 नवंबर को हमें एक कैंप में भर्ती किया गया और फिर मॉस्को से ढाई घंटे की दूरी पर स्थित एक सूनसान जगह पर ले जाया गया. हमने भारतीय एजेंट से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि हमें हेल्पर्स के तौर पर ही रखा जाएगा. लेकिन हमें टेंट में रखा गया और हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाने लगा. फिर 4 जनवरी को हमें रूस के डोनात्स्क में जंग लड़ने के लिए भेज दिया गया.”

युवक ने आगे बताया, “मुझे जंग लड़ने के लिए मजबूर किया गया था. लेकिन मुझे जैसे ही मौका मिला, मैंने हथियार फेंक दिए. लेकिन मैं पकड़ा गया और मुझे बंदूक की नोंक पर धमकाया गया. उन्होंने मुझसे एक इमारत से दूसरी इमारत तक कुछ सामान पहुंचाने के लिए कहा. कमांडर ने हमें कहा कि हम एक-दूसरे से पांच मीटर की दूरी पर रहें ताकि हम दुश्मन की गोलियों का आसान शिकार ना बने. छोटी सी दूरी तय करने में ही हमें करीब 7-8 गोलियों का सामना करना पड़ा. हमारे साथ जा रहा एक लोकल भी मारा गया. आखिरकार 22 जनवरी को मैं भागने में कामयाब रहा और अपना इलाज कराने के लिए एक अस्पताल में भर्ती हुआ.”

पीड़ित व्यक्ति ने बताया, “मैं कई दिनों तक बिना फोन के रहा. युद्ध क्षेत्र से भागने के बाद मैंने कई बार अपने घर वालों से संपर्क साधने की कोशिश की. रूस में भारतीय दूतावास से मैंने कई बार अपील की लेकिन कोई मदद नहीं मिली. मेरे पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे और ना ही पैसे. सरकार भी हमारी मदद नहीं कर रही है.”

जान को गंभीर खतराः एजेंट
रूस में इन भारतीयों को रिसीव करने वाले एक एजेंट ने ‘द हिंदू’ को बताया कि ये लोग भारत के अलग-अलग राज्यों से हैं और अगर सरकार जल्द कुछ कदम नहीं उठाती है तो इनकी जान को गंभीर खतरा है.

एजेंट ने कहा, “उन्हें रूस में आर्मी हेल्पर्स की नौकरी ऑफर की गई थी. उनसे कहा गया था कि उन्हें तीन महीनों तक ट्रेनिंग दी जाएगी और कुछ सामान्य टेस्ट किए जाएंगे. उनसे किचन हेलपर्स या इसी तरह के दूसरे कुछ काम कराए जाएंगे. लेकिन एक महीना बीतने के बाद उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और उन्हें यूक्रेन के खिलाफ रूस की तरफ से लड़ने के लिए मजबूर किया गया. कई दूसरे देशों के लोग भी यहां फंसे हुए हैं.”

असदुद्दीन ओवैसी ने विदेश मंत्री को लिखा पत्र
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर रूस में फंसे तीन भारतीय नागरिकों को वापस लाने में मदद की अपील की है. ओवैसी ने अपने पत्र में लिखा है कि तीनों भारतीय नागरिकों से पिछले 25 दिनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे उनके परिवार वाले चिंतित हैं. उनके परिवार वाले उनकी सुरक्षित देश वापसी कराने की गुहार लगा रहे हैं.

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