‘पहले हिंदू-मुसलमान में बांटा और अब…’, किसान आंदोलन को लेकर नेहा सिंह राठौर ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना

लोक गायिका नेहा सिंह राठौर अकसर ही चर्चा में बनी रहती हैं। वह गीतों के जरिए सरकार की नाकामियों पर व्यंगात्मक अंदाज में सवाल उठाती हैं। इसको लेकर कई बार अलग-अलग जिले और राज्यों ने उनके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हुए हैं। यूपी में का बा…गीत से वह सुर्खियों में आई थीं। उसके बाद से उनका हर एक गीत सोशल मीडिया पर खूब वायरल होता है।

वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और लगभग हर मुद्दे पर अपनी राय रखती नजर आती हैं। नेहा सिंह इन दिनों किसान आंदोलन और लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले यूपी में आई सिपाही भर्ती पर हमला बोला है। उन्होंने यूपी पुलिस भर्ती पेपर लीक को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

नेहा सिंह राठौर ने क्या लिखा
लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि “पहले इन लोगों ने देश को हिन्दू और मुसलमान में बांटा, अब हिंदुओं को सिख भाइयों से अलग करने पर तुले हुए हैं। ये देश के साथ डिवाइड एंड रूल वाला खेल खेल रहे हैं। ये किसानों की MSP, स्टूडेंट्स की नौकरी और कर्मचारियों की पेंशन खाना चाहते हैं। इस बात को कभी मत भूलना। वोटिंग वाले दिन भी नहीं।”

नेहा सिंह यहीं नहीं रुकी उन्होंने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि “आज पेपर लीक के विरोध में अपना खून जला लो, नारे लगा लो, लाठी खा लो। कल जब वोट देने का मौक़ा आये तो अपने माँ-बाप और घर-भर के साथ जाकर फिर से कमल खिला देना और मूर्ख बन जाना। अरे अभी भी मौक़ा है संभल जाओ! वरना ये आदमी पकौड़ा तलवा कर ही मानेगा तुम लोगों से। “अपने ग़ुस्से को पालना सीख काशी बेटा!” गायिका ने इसी के साथ यूपी पेपर लीक और किसान प्रोटेस्ट के हैसटैग लगाए हैं। नेहा सिंह के ये ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं।

यूजर्स की प्रतिक्रियाएं

नेहा सिंह राठौर के ट्वीट पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि ‘इनकी राजनीति सिर्फ धर्म पर ही चलती है।’ एक यूजर ने लिखा कि ‘किसने भारत को धर्म के आधार पर बांटा?किसने सेकुलर देश में पर्सनल लॉ बोर्ड वक्फ बोर्ड बनाया? किसने पाकिस्तान के लिए वोट करने वालों को भारत में वोट बैंक के लिए रोका?कौन हज हाउस और हज सब्सिडी देते रहे?जब मुस्लिम मुस्लिम होता रहा तब ठीक था।’ एक यूजर ने लिखा कि ‘एक बार पेपर लीक क्या हुआ बोलने का मौका मिल गया। जांच चल रही है दोषी पकड़े गए हैं और भी पकड़े जाएंगे। जरूरी हुआ तो पेपर भी दोबारा होगा। उसका क्या जो पेपर कराए बगैर ही भर्ती कर रहे थे? डायरेक्ट लिस्ट जारी की जाती थीं। शायद याद न हो, मायावती जी ने 2006 की भर्ती की जांच कराई।’

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