पेट्रोल-डीजल की कीमत में कमी भूल जाइए, सूख गया है ‘दोस्त’ रूस की टंकी का डिस्काउंट

नई दिल्ली

चुनावी साल में अगर आप पेट्रोल-डीजल की कीमत में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं तो भूल जाइए। भारत की कंपनियों को अब रूस से मिल रहा तेल सस्ता नहीं रह गया है। लाल सागर में हूतियों के आतंक से फ्रेट रेट्स बढ़ गए हैं। साथ ही अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण भारत आ रहे रूस के कुछ जहाज फंस गए हैं। इन कारणों से भारत की तेल कंपनियों के लिए रूस का तेल महंगा हो गया है। इससे कुछ कंपनियों को मिडिल ईस्ट से महंगा तेल खरीदना पड़ कता है। इससे उनका प्रॉफिट प्रभावित होगा। देश में करीब 21 महीने से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं आया है। अप्रैल 2022 में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमत में बदलाव किया था जबकि मई में केंद्र ने पेट्रोल पर एक्साइज में कटौती की थी।

भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद दुनिया के कई देशों ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था। तब रूस ने भारत और चीन को सस्ते में कच्चा तेल बेचना शुरु किया। इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की नेट इनकम पटरी पर लौटनी शुरू हो गई थी लेकिन अब एक बार फिर उन पर दबाव बढ़ने लगा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक केयरएज ग्रुप के डायरेक्टर हार्दिक शाह ने कहा कि हायर फ्रेट रेट के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में पिछली तिमाही में गिरावट आई है। इस फाइनेंशियल ईयर में उनके मार्जिन में कमी आ सकती है। हालांकि यह प्री-वॉर लेवल से ज्यादा रहेगा।

रिलायंस की चांदी
सरकारी कंपनियां देश में ही पेट्रोल-डीजल बेचती हैं और उन्हें विदेशों में ज्यादा कीमत का फायदा नहीं मिलता है। दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां एक्सपोर्ट से मोटा पैसा कमाती हैं। इस बारे में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। केयरएज के मुताबिक जब तक क्रूड की कीमत 90 डॉलर के नीचे रहती हैं तब तक ओवरऑल मार्जिन प्रति बैरल 10 डॉलर के करीब रहेगा। ब्रेंट अक्टूबर से ही इससे नीचे बना हुआ है। गुरुवार को फ्यूचर्स करीब 83 डॉलर के आसपास है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों के आतंक से दुनिया में फ्यूल ट्रेड प्रभावित हुआ है।

भारत से यूरोप के लिए फ्यूल की सप्लाई फरवरी के पहले दो हफ्तों में रोजाना 18,000 बैरल रही। यह जनवरी की तुलना में 90 फीसदी से भी ज्यादा कम है। लाल सागर में जारी स्थिति से रिलायंस और नयारा एनर्जी पर कुछ असर हो सकता है। हालांकि उनके पास एशिया और अफ्रीका में एक्सपोर्ट करने का विकल्प है। रूस से मिल रहे सस्ते कच्चे तेल के कारण भारतीय रिफाइनर्स के लिए लागत साउथ कोरिया, सिंगापुर और दूसरी कंपनियों के मुकाबले सस्ती हो गई थी। Rysted Energy में ऑयल ट्रेडिंग और डाउनस्ट्रीम रिसर्च के हेड मुकेश सहदेव ने कहा कि अगर भारत को रूसी तेल पर फायदा नहीं मिलता है तो वह अपना एडवांटेज खो देगा।

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