भारत और चीन के बीच नहीं बनी बात, कोर कमांडरों की 21वें दौर की बातचीत में गतिरोध वाले मुद्दों पर प्रगति नहीं’

नई दिल्ली

भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 21वीं दौर की बैठक सोमवार को चुशुल-मोल्डो बॉर्डर पॉइंट पर हुई। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि सैन्य अफसरों की इस उच्चस्तरीय बातचीत में दोनों देशों ने LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के पास सीमावर्ती इलाकों में शांति और सद्भाव बनाए रखने पर सहमति जताई है। वार्ता के दौरान पूर्वी लद्दाख में LAC के पास के बचे हुए क्षेत्रों से सैनिकों की पूरी तरह वापसी को शांति और सद्भाव बहाली के लिए जरूरी बताया गया है। दोस्ताना माहौल में हुई इस बातचीत में दोनों पक्षों ने इस मामले में अपने-अपने रुख को साझा किया। दोनों पक्ष प्रासंगिक सैन्य और राजनयिक तंत्र के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं।

जानकारों का कहना है कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में समाधान के लिए साढ़े तीन साल से चल रही कवायद पर सोमवार को हुई बातचीत में कोई स्पष्ट प्रगति नहीं देखी गई। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों पक्ष पश्चिमी सेक्टर में जमीन पर सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हुए। दोनों पक्ष निकट संपर्क में रहने और सैन्य तथा राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत करने और शेष मुद्दों का जल्द से जल्द पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान निकालने पर सहमत हुए।

देपसांग और डेमचोक का निकलना है हल
पूर्वी लद्दाख के जिन विवादों का हल अभी नहीं निकला है, उनमें देपसांग मैदान और डेमचोक शामिल हैं। देपसांग में चीनी सैनिक वाई जंक्शन से पट्रोलिंग पॉइंट (PP) 10 से 13 तक भारतीय पहुंच को बाधित कर रहे हैं। यहां 972 वर्ग किमी. जमीन तक पहुंच में बाधा है। यह इलाका उत्तर में रणनीतिक रूप से अहम दौलत बेग ओल्डी के नजदीक है। पूर्वी लद्दाख के साउथ में मौजूद डेमचोक में मुख्य समस्या चार्डिंग निंगलुंग नाला (CNN) जंक्शन पर है। कई बार चीनी सैनिकों ने वहां सैडल पास पर भारतीय चरवाहों को रोक दिया है।

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