बांग्‍लादेश के बाद म्‍यांमार, अंडमान से 55 किमी दूर बनाया सैन्‍य अड्डा, भारत के एक और पड़ोसी का चीन से रिश्‍ता!

रंगून:

बांग्‍लादेश में चीन की पनडुब्‍ब‍ियों के लिए विशाल नेवल बेस बनाने के खुलासे के बाद अब म्‍यांमार में एक सैन्‍य अड्डे ने भारत की टेंशन बढ़ा दी है। ताजा सैटलाइट तस्‍वीरों से खुलासा हुआ है कि म्‍यांमार की सेना ने बंगाल की खाड़ी में अपने कोको द्वीप समूह पर दूसरे सैन्‍य एयरक्राफ्ट के हैंगर का निर्माण कार्य अब पूरा कर लिया है। इससे म्‍यांमार की सेना की क्षमता में काफी बढ़ोत्‍तरी हो गई है जिससे उसके इरादों को लेकर बड़ा सवाल उठने लगा है। इस सैन्‍य अड्डे का निर्माण भारत के अंडमान निकोबार द्वीप से मात्र 55 किमी की दूरी पर किया गया है जो नई दिल्‍ली के लिए मुश्किल बढ़ा सकता है। ऐसी अफवाह है कि इस सैन्‍य अड्डे को चीन ने बनाया है जहां चीनी खुफिया एजेंसी का अड्डा भी है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

म्‍यांमार की सरकार 1990 के दशक से ही कोको द्वीप पर सैन्‍य गतिविधि बढ़ा रही है। पिछले साल चैथम हाउस थिंकटैंक की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि म्‍यांमार ने 2300 मीटर लंबा रनवे और रेडॉर स्‍टेशन बनाया है। इसके अलावा दो हैंगर बनाए जा रहे थे। यहां पर नौसैनिकों को रहने के लिए घर भी बनाए गए थे। इस द्वीप पर म्‍यांमार की सेना सफाई अभियान चला रही है ताकि पेड़ों को काटकर वहां सैन्‍य अड्डे का विस्‍तार किया जा सके। यह ग्रेट कोको द्वीप मात्र 11 किमी में फैला है लेकिन इसका लोकेशन रणनीतिक रूप से बहुत ही महत्‍वपूर्ण है।

अंडमान में भारतीय नौसेना का बेस, चीन की नजर?
कोको द्वीप न केवल मलक्‍का स्‍ट्रेट से करीब है जो दुनिया का सबसे व्‍यस्‍त व्‍यापारिक मार्ग है, बल्कि भारत के अंडमान निकोबार द्वीप से मात्र 55 किमी की दूरी पर है। अंडमान में ही भारत की तीनों ही सेनाओं की एकीकृत कमान है। इस सैन्‍य अड्डे के निर्माण से यह अटकलें शुरू हो गई हैं कि चीन यहां अपने पैर पसार रहा है। म्‍यांमार में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद से ही चीन ने इस देश में अपना दबदबा बढ़ा दिया है। चीन की सेना म्‍यांमार की सीमा पर लगातार युद्धाभ्‍यास करके डराने की कोशिश भी कर रही है। विश्‍लेषकों का कहना है कि चीन कोको द्वीप से जासूसी की गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है।

म्‍यांमार के इस कदम से भारत अलर्ट है और अंडमान में नेवल बेस का विस्‍तार किया जा रहा है। भारत ने हाल ही में हजारों करोड़ रुपये की लागत से अंडमान द्वीप पर सैन्‍य अड्डा तैयार किया है और इसे विस्‍तार भी दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि भारत ने चीन के जासूसी अड्डे की खबर पर म्‍यांमार से विरोध भी जताया है। चीन ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है। म्‍यांमार ने हाल ही में ताइवान के मामले में चीन का समर्थन किया है। यही नहीं चीन के नाटो कहे जाने वाले ग्‍लोबल सिक्‍यॉरिटी इनिशिएटिव का भी समर्थन किया है। असल में विशेषज्ञों का कहना है कि म्‍यांमार की सैन्‍य सरकार को गृहयद्ध के बीच पैसे की सख्‍त जरूरत है लेकिन पश्चिमी देशों ने उसके खिलाफ प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसका चीन फायदा उठा रहा है। साल 2020 में ही म्‍यांमार के कुल विदेशी कर्ज का 40 प्रतिशत चीन ने दिया था। चीन ने म्‍यांमार के एक पोर्ट में बड़े पैमाने पर निवेश कर रखा हुआ है। इससे वह आसानी से हिंद महासागर में आ सकता है।

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