मालदीव संसदीय चुनाव में मुइज्जू की जीत भारत के लिए बड़ा झटका कैसे, चीन की हो गई बल्ले-बल्ले

माले:

मालदीव के संसदीय चुनाव में चीन समर्थक राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पार्टी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) ने धमाकेदार जीत दर्ज की है। इस जीत को मुइज्जू की नीतियों पर जनता के मुहर के तौर पर देखा जा रहा है। मुइज्जू ने यह जीत तब हासिल की है, जब कुछ महीने पहले उन्हें माले के मेयर चुनाव में करारी हार झेलनी पड़ी थी। इतना ही नहीं, चंद दिनों पहले रिहा हुए पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने भी इस चुनाव में मुइज्जू सरकार की जमकर आलोचना की थी। मुइज्जू की पार्टी की जीत से हिंद महासागर में भारत की टेंशन बढ़ सकती है। वहीं, चीन इस नतीजे से काफी खुश होगा, क्योंकि अब उसे मालदीव में कुछ भी करने की छूट मिल जाएगी। अभी तक संसद में विपक्षी एमडीएफ को बहुमत प्राप्त था, जिस कारण मुइज्जू की मनमानी नहीं चल पाती थी।

भारत विरोध पर चुनाव लड़ रहे मुइज्जू
21 अप्रैल को मालदीव की संसद (मजलिस) के लिए चुनाव हुए थे। इस चुनाव में मुइज्जू ने मालदीव की जनता से संसद में बहुमत की मांग की थी। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान परोक्ष रूप से विपक्षी पार्टी एमडीपी का संबंध भारत से जोड़ा था। उन्होंने आरोपों में कहा था कि एमडीपी विदेशी देशों के इशारे पर काम कर रही है। मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद से मालदीव और भारत के संबंधों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस चुनाव से पहले मुइज्जू का गठबंधन अभी संसद में अल्पमत में था।

अभी तक विपक्ष के पास था बहुमत
मुइज्जू की प्रतिद्वंद्वी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) हैं जिसके पास अभी तक संसद में बहुमत था। एमडीपी का नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह और पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद जैसे भारत समर्थक लोगों के हाथों में है। एमडीपी ने पेमेंट पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल मुइज्जू के खिलाफ किया है। मुइज्जू के चुनाव जीतने के बाद विपक्षी एमडीपी ने उन्हें पद से हटाने की धमकी दी थी और उनकी सरकार के लिए प्रमुख कैबिनेट नियुक्तियों की पुष्टि करने से इनकार कर दिया था लेकिन अब, मुइज्जू ने संसद पर कब्ज़ा करने के लिए करारी जीत हासिल कर ली है। इसका मतलब मुइज्जू की शक्ति अब कई गुना बढ़ गई है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
नवंबर 2023 में मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद से भारत के उनके साथ मालदीव के संबंध लगातार खराब हो रहे हैं। मुइज्जू मालदीव के राजनेताओं के उस वर्ग से हैं जो देश पर भारत के आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव को लेकर सशंकित हैं। उन्होंने राष्ट्रपति बनते ही भारतीय सैनिकों से मालदीव छोड़ने को कहा था। मुइज्जू ने मालदीव को उसकी पारंपरिक “इंडिया फर्स्ट” विदेश नीति से दूर ले जाने की भी कोशिश की है। इसका मतलब चीन के साथ घनिष्ठ संबंध है। मुइज्जू ने इस साल की शुरुआत में चीन का दौरा कर कई गुप्त समझौते भी किए थे।

भारत को झटके दे रही मुइज्जू सरकार
मुइज्जू ने भारत के साथ एक नौसैनिक सहयोग समझौते को रिन्यू करने से भी इनकार कर दिया और चीन को अपने “जासूस जहाजों” को डॉक करने की अनुमति दी। जनवरी में मुइज्जू कैबिनेट के तीन मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा को लेकर आपत्तिजनक कमेंट्स किए थे, जिसके बाद भारत में बॉयकाट मालदीव ट्रेंड चलने लगा था। इसी विवाद के कारण इस साल मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में असामान्य गिरावट देखने को मिली है। कुल मिलाकर, यह भारत-मालदीव संबंधों के लिए बहुत बुरा समय रहा है।

मुइज्जू की जीत से चीन को फायदा
मुइज्जू की यह नई चुनावी जीत भारत के लिए हालात को बहुत खराब और चीन के लिए बेहतर बना सकती है। इसमें बड़े रक्षा और सुरक्षा निहितार्थ हो सकते हैं क्योंकि मालदीव हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर स्थित है। चीन की कोशिश मालदीव में एक सैन्य अड्डा स्थापित करने की है। चीन ने इसके लिए मालदीव के साथ एक गुप्त समझौता भी किया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन ने मालदीव में एक नौसैनिक रडार स्टेशन स्थापित करने के लिए समझौता किया है। इसके साथ ही मालदीव की सेना के लिए ट्रेनिंग और हथियारों को लेकर भी एक समझौता हुआ है।

क्या सचमुच बिगड़ चुका है भारत-चीन संबंध
भारत-मालदीव संबंधों में कई चीजें बदल गई हैं। हाल ही में, भारत ने मालदीव को बड़ी मात्रा में चीनी और प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं का निर्यात किया है। भारत ने मालदीव को यह मदद इन वस्तुओं के वैश्विक निर्यात प्रतिबंधों के बावजूद किया है। मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने सार्वजनिक रूप से इस कदम के लिए भारत को धन्यवाद दिया। इससे पता चला कि दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग बंद नहीं हुआ है। हाल ही में एक इंटरव्यू में मुइज्जू ने भारत को अपने देश का सबसे करीबी सहयोगी बताया था। उन्होंने भारत के कर्ज के पुनर्गठन में मदद का भी अनुरोध किया था।

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