यूक्रेनी किलर ड्रोन के हमलों का पुतिन को सता रहा डर, कैंसिल की विक्‍ट्री डे परेड जिसे कहा जाता है रूस का गर्व

मॉस्को

यूक्रेन में दो साल से ज्यादा समय से जारी जंग के बाद भी रूस को अभी तक सफलता हाथ नहीं लगी है। इसके उलट यूक्रेन से रूस को कड़ी टक्कर मिल रही है। हाल ही में यूक्रेन ने रूस के खिलाफ घातक ड्रोन हमले शुरू किए हैं, जिसने मॉस्कों को भयभीत कर दिया है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों का डर ऐसा है कि रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को वार्षिक विजय परेड के कार्यक्रमों को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 71 वर्षीय पुतिन ने रूसी कैलेंडर से सबसे महत्वपूर्ण दिन 9 मई को होने वाले अधिकांश समारोहों को रद्द कर दिया है। इसकी वजह बने हैं यूक्रेन के ड्रोन हमले, जिनकी सटीक काट अभी तक पुतिन की सेना नहीं ढूढ़ पाई है।

विजय दिवस परेड का आयोजन द्वितीय विश्वयुद्ध में नाजी जर्मनी को हराने की यादगार के तौर पर किया जाता है। मॉस्को के रेड स्क्वॉयर पर होने वाली इस परेड में रूस के राष्ट्रपति गेस्ट ऑफ ऑनर होते हैं। राष्ट्रपति पुतिन इस आयोजन का इस्तेमाल आमतौर पर रूसी सेना की ताकत दिखाने के लिए करते हैं। ब्रिटिश मीडिया पोर्टल द सन की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार इस परेड पर संकट के बादल छाए हैं। हालांकि, राष्ट्रपति पुतिन की मौजूदगी में कड़ी सुरक्षा के बीच रेड स्क्वॉयर पर परेड का आयोजन होगा लेकिन इसमें बड़े तोपखानों का प्रदर्शन नहीं होगा। इसके साथ ही कई क्षेत्रीय परेडों को भी रद्द किया गया है, जिसमें बेलगोरोद, ब्रांस्क, रियाजान, कुर्स्क और सेराटोव क्षेत्र भी शामिल हैं।

यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों में भी नहीं होगी परेड
रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा खतरों की वजह से जापोरिजिया समेत यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों और क्रीमिया में भी परेड को रद्द कर दिया गया है। इन परेड पर रोक लगाने के पीछे पुतिन का एक दूसरा डर भी हो सकता है कि इस परेड के दौरान युद्ध विरोधी प्रदर्शनकारी हावी हो सकते हैं और इससे मॉस्को की बदनामी होगी। यूक्रेन पर हमले के बाद से ही रूस में युद्ध विरोधी भावना जोरों पर है। बड़ी संख्या में लोग हमले के विरोध में सड़कों पर उतर चुके हैं। हालांकि, पुतिन ने इन प्रदर्शनों से निपटने में बहुत सख्ती दिखाई है।

2023 में भी रद्द हुई थी परेड
पिछले साल भी रूस ने देश के बड़े हिस्से में विजय दिवस परेड को रद्द कर दिया था। मॉस्को में एक छोटा सा कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें किसी बड़े सैन्य हथियार का प्रदर्शन नहीं किया गया था। ये भी कहा जा रहा है कि यूक्रेन में दो साल से जारी युद्ध के चलते परेड में प्रदर्शित किए जाने के लिए टैंकों की कमी है, जिसकी वजह से भी इसे रद्द करना पड़ा है।

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