क्या है जिरेटोप, जिसे शिवाजी ने पहनकर अफजल खां को फाड़ डाला था, मोदी के पहनने पर क्यों मचा बवाल

मुंबई:

यह बात 1659 की है, जब हिंदुस्तान पर मुगल बादशाह औरंगजेब की हुकूमत थी। मुगलों की सत्ता को तेजी से उभर रहे एक मराठा छत्रपति शिवाजी चुनौती दे रहे थे। मुगलों के सहयोगी बीजापुर के सुल्तान का दरबार लगा था। दरअसल, यह दरबार इसलिए बुलाया गया था, क्योंकि शिवाजी ने तब आदिलशाही सल्तनत के जनरल मुल्ला अली को पराजित करके रायगढ़ किले पर कब्जा कर लिया था। इसके अलावा, उन्होंने तोरणा के किले पर भी कब्जा जमा लिया था। शिवाजी की बढ़ती ताकत से परेशान आदिलशाही सल्तनत ने अपने सभी बड़े सरदारों और सिपहसालारों को दरबार में बुला रखा था। उस दरबार में दोवागर की रानी बड़ी साहिबा भी मौजूद थीं, जो बीजापुर के प्रशासन का जिम्मा खुद संभालती थीं। दरअसल, पीएम नरेंद मोदी के हाल ही में हुए महाराष्ट्र दौरे के वक्त जिरेटोप पहनने से बवाल हो रहा है। यह कहानी छत्रपति शिवाजी और उनके जिरेटाेप को लेकर ही है।

जब अफजल खान ने उठा लिया पान
विल्सन कॉलेज, मुंबई में प्रोफेसर रहे एनएस टाकाखाव की किताब ‘द लाइफ ऑफ शिवाजी महाराज’ के अनुसार, दरबार में चर्चा शुरू ही हुई थी कि बड़ी साहिबा के एक सवाल से पूरा दरबार सन्न रह गया। बड़ी साहिबा ने पूछा कि कोई है जो शिवाजी और उनके विद्रोह को दबा सकता है? इस सवाल पर हर कोई एक-दूसरे का मुंह ताकने लगा। तभी एक बड़े डील-डौल वाला व्यक्ति उठ खड़ा हुआ। उसने बड़ी साहिबा की चुनौती स्वीकार कर ली। उसने थाल में पड़ा पान उठा लिया, जो चुनौती को स्वीकार करने का प्रतीक था। उसका नाम था अफजल खान।

अफजल बोला, शिवाजी की लाश लेकर आऊंगा
अफजल खान ने भरे दरबार में कहा कि ये शिवाजी कौन है? मैं उसे पकड़कर घसीटता हुआ लेकर आऊंगा और यह संभव नहीं हुआ तो उसकी लाश लेकर आऊंगा। अफजल खान की कद-काठी देखने में किसी बड़े राक्षस जैसी दिखती थी। वह लोहे के राड को अपने हाथों से मोड़ सकता था। अफजल खान की चुनौती पर हर किसी को यकीन हो रहा था कि वह शिवाजी को जिंदा या मुर्दा लेकर जरूर आएगा। वह शिवाजी को पकड़ने के लिए लाव-लश्कर के साथ चल दिया।

रणनीति में माहिर शिवाजी ने किला बदला
उस वक्त शिवाजी राजगढ़ में थे। अफजल खान के मंसूबों के बारे में उन्हें खबर मिल चुकी थी। उन्होंने उसी वक्त अपना मुख्यालय राजगढ़ से प्रतापगढ़ शिफ्ट कर दिया। जब अफजल खान को यह बात पता चली तो वह आगबबूला हो उठा। वह जानता था कि प्रतापगढ़ का किला इतना दुर्गम था कि उसे जीत पाना बेहद मुश्किल था। दरअसल, यह किला चारों ओर से घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ था। यहां पहुंचना ही कठिन था।

शिवाजी को किले से उतारने के लिए मंदिरों पर हमले
महाराष्ट्र सरकार की किताब शिव छत्रपति के अनुसार, ऐसे में शिवाजी को मैदानों की ओर लाने के लिए अफजल खान ने शिवाजी के प्रभुत्व वाले और मराठों के पवित्र तीर्थस्थलों पंढ़रपुर और तुलजापुर में हमला बोल दिया और लोगों को जमकर यातनाएं देने लगा। उसे यह उम्मीद थी कि शिवाजी अत्याचार की खबरें सुनकर पहाड़ पर बने किले से उतरकर नीचे मैदान में आ जाएगा। मगर, शिवाजी उसकी रणनीति भांप गए। वह नीचे नहीं आए।

अफजल खान का मैसेज- बेटे जैसे हो, मिलो
इन हमलों के बाद भी जब शिवाजी मैदान में नहीं आए तो अफजल खान ने अपनी रणनीति बदल दी। उसने शिवाजी के पास एक मैसेज भेजा-आप मेरे बेटे जैसे हो। आप आओ और मुझसे मिलो। हमारे किले लौटा दो। इसके बाद मैं कोशिश करूंगा कि आदिलशाह आपको अपने दरबार में एक सरदार बना देंगे।

शिवाजी ने मैसेज का कुछ यूं दिया जवाब
शिवाजी ने भी चतुराई बरतते हुए मैसेज भेजा-खान साहेब, आपके किलों पर कब्जा करने के लिए मैं शर्मिंदा हूं। आप प्रतापगढ़ किले के पास आइए और मुझसे मिलिए। मुझे मैदान में आपसे मिलने में वाकई डर लगता है। शिवाजी के इस जवाब से अफजल खान खुश हो गया। उसे लगा कि शिवाजी तो उससे डरते हैं। अफजल खान ने सोचा कि वह शिवाजी से मिलने जाएगा और मुलाकात के दौरान ही उनका खात्मा कर देगा। उसने शिवाजी का प्रस्ताव मंजूर कर लिया।

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