समुद्र में दो खंभे पर बसा है दुनिया का सबसे छोटा देश, पासपोर्ट और करेंसी भी है मौजूद, तख्तापलट की भी हो चुकी है कोशिश

लंदन:

दुनिया का सबसे छोटा देश आधिकारिक तौर पर वेटिकन सिटी को माना जाता है। लेकिन एक ऐसी जगह है जहां के लोग खुद को सबसे छोटे देश के नागरिक होने का दावा करते हैं। यह देश बेहद हैरान करने वाला है, क्योंकि यह समुद्र में दो खंभों पर बसा हुआ है। ब्रिटेन के उत्तरी सागर में तट से 12 किमी की दूरी पर सीलैंड रियासत मौजूद है, जो एक माइक्रोनेशन है। यह दुनिया का सबसे छोटा देश होने का दावा करता है। इस जगह पर जाने के लिए आपको स्पेशल परमिट और पासपोर्ट की जरूरत होगी। वहीं एक देश की तरह इस जगह का झंडा भी है।

इस जगह को ब्रिटिश सेना ने 1942 में बनाया था। इसका प्रमुख लक्ष्य जर्मन सेना से ब्रिटेन के तटों की रक्षा था। दूसरे विश्युद्ध के बाद यह जगह खाली पड़ी थी। 1960 के दशक में ब्रिटिश सेना के पूर्व मेजर रॉय बेट्स ने अपना रेडियो स्टेशन चलाना चाहते थे। लेकिन ब्रिटेन में बीबीसी के अलावा दूसरा रेडियो स्टेशन स्थापित करना पूरी तरह से अवैध था। 1967 में बेट्स ने सीलैंड को खरीद लिया। अंतरराष्ट्रीय जल में होने के कारण उन्होंने इसे एक स्वतंत्र संप्रभु राज्य घोषित किया। उन्होंने अपना नाम सीलैंड का प्रिंस रॉय रखा और अपना पासपोर्ट और टिकट जारी कराना शुरू कर दिया।

क्या सीलैंड एक स्वतंत्र देश है?
सीलैंड के एक देश होने की स्थिति विवादित है। यूके समेत दुनिया का कोई भी देश सीलैंड को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है। हालांकि सीलैंड के पास अपना झंडा, अपनी मुद्रा और सरकार है। यहां जाने के लिए आप स्पेशल परमिट लेंगे। नाव के जरिए यहां पहुंचा जाएगा और सीलैंड में रहने वाला बेट्स का परिवार एक रस्सी के जरिए आपको ऊपर खींच लेगा। यहां जाने पर आपके पासपोर्ट पर सीलैंड का स्टांप लगाया जाएगा। इस टावर में रहने भर की सभी सुख सुविधाएं हैं।

सीलैंड के पास क्या-क्या है?
इसके आकार की बात करें तो यह दो टेनिस कोर्ट के बराबर है। ब्रिटेन ने इस तरह के चार टावर बनाए थे। इसके टावर के खंबे अंदर से खोखले हैं, जिनमें कमरे बने हैं। यहां एक लिविंग रूम, एक टॉयलेट, किचन, जिम और एक जेल भी है। यहां पर बिजली हवा और सोलर एनर्जी के जरिए मिलती है। समुद्र के बीच में होने से यहां पानी की बड़ी समस्या है। लेकिन बेट्स का परिवार बारिश के पानी को इकट्ठा करता है। दुनिया भर में सीलैंड के 300 नागरिक हैं। यहां पर एक जर्मन शख्स ने ग्रुप के साथ 1978 में तख्तापलट की कोशिश की थी, जिसे जेल में डाल दिया गया था। जर्मनी ने तब ब्रिटेन से हस्तक्षेप को कहा था। लेकिन ब्रिटेन ने कहा कि यह उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता। बाद में जर्मनी ने डिप्लोमैट के जरिए बातचीत की और अपने नागरिक को छुड़ाया।

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