लाखों की सैलरी पर ऑउटसोर्स स्टाफ, ठेके पर एग्जाम सेंटर! ऐसे परीक्षाएं करवाता है पेपर लीक विवाद में घिरा NTA

नई दिल्ली,

मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET 2024) का बवाल अभी कम हुआ ही नहीं था कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से आयोजित होने वाली एक और परीक्षा यूजीसी-नेट खबरों में आ गई है. दरअसल, शिक्षा मंत्रालय ने यूजीसी-नेट परीक्षा को कैंसल कर इसकी जांच सीबीआई को देने का फैसला किया है. नीट और नेट परीक्षाओं में गड़बड़ी होने के बाद अब एनटीए सवाल के घेरे में है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर सवालों के घेरे में खड़ा एनटीए आखिर परीक्षा कैसे करवाता है?

क्या है एनटीए?
एनटीए का पूरा नाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी है, जिसकी स्थापना साल 2017 में हुई थी. इस एजेंसी का काम उच्च शिक्षा और विभिन्न सरकारी संस्थानों में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षाओं का आयोजन करना है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की स्थापना भारतीय संस्था पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत हुई थी और मानव संसाधन मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) ने NTA का गठन किया था.

एनटीए के पास नीट और नेट के अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड एंट्रेंस टेस्ट, कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET), ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेन्स एग्जाम, कॉमन मैनेजमेंट कम एडमिशन टेस्ट (CMAT) नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी एंट्रेंस एग्जाम, जॉइंट इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (JIPMAT) परीक्षाएं करवाने का जिम्मा भी है.

कैसे तैयार होता है पेपर?
अब आपको बताते हैं कि एनटीए के पेपर कैसे तैयार होते हैं और किन स्टेप से गुजरकर परीक्षार्थी के पास पहुंचते हैं. एनटीए की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, सबसे पहले सब्जेक्ट एक्सपर्ट टेस्ट आइटम तैयार करते हैं. इसके बाद सवालों के बैंक तैयार किए जाते हैं. इसके बाद टेस्ट डवलपमेंट कमेटी इसकी जांच करती है और फिर पेपर लिखे जाते हैं. इसके बाद इनकी जांच होती है और कुछ सवालों को हटाया जाता है और टेस्ट को असेंबल किया जाता है. इसके बाद फाइनल पेपर बनते हैं.

फिर कैसे होती है परीक्षा?
अब बात करते हैं कि आखिर परीक्षा कैसे होती है. दरअसल, पेपर बनाने का काम एनटीए का होता है और वो अन्य आउटसोर्स के जरिए परीक्षा का आयोजन करवाता है. लेकिन, एनटीए पर सवाल उठने के पीछे एक अहम वजह ये है कि एनटीए अधिकतर काम टेंडर व्यवस्था पर करता है. कई रिपोर्ट्स में यह कहा गया है कि परीक्षा करवाने के लिए एनटीए के खुद की कोई व्यवस्था नहीं है और आउटसोर्सिंग के जरिए परीक्षाएं करवाई जाती हैं.

ऐसे में कई टेंडर निकाले जाते हैं और कंपनियों को हायर किया जाता है. ये कंपनियां ही परीक्षा केंद्र का पूरा काम देखती हैं और यहां तक कि पूरा स्टाफ भी आउट सोर्स के जरिए हायर किया जाता है. ऐसे में माना जा रहा है कि इन कंपनियों की लापरवाही से परीक्षाओं में गड़बड़ी पाई जाती है.

किस किस का निकलता है टेंडर?
– एनटीए एग्जाम सेंटर और उनकी व्यवस्थाओं के लिए टेंडर जारी करता है और उनके जरिए ही कंप्यूटर, सीसीटीवी जैसी व्यवस्थाएं करवाई जाती हैं. एनटीए ने जब एग्जाम सेंटर का जो टेंडर निकाला था, वो 1 करोड़ ईएमडी रेट के हिसाब से टेंडर निकाला था. इस टेंडर में एग्जाम सेंटर के लिए आवेदन मांगे गए थे. आप नीचे पीडीएफ के जरिए देख सकते हैं, एनटीए ने टेंडर में क्या क्या मांगा था.

– स्टाफ के लिए भी एनटीए ने एक टेंडर जारी किया था. आउटसोर्स स्टाफ में एनटीए की ओर से टेक्निकल सपोर्ट ग्रुप, ऑफिस असिस्टेंट, सीनियर असिस्टेंट, कंसल्टेंट, जूनियर कंसल्टेंट एडवाइडर, डेटा एनालिस्ट आदि पदों पर मैनपावर के लिए टेंडर जारी किया था. हालांकि, इसमें सभी कर्मचारियों की एजुकेशन डिटेल भी एनटीए ने मांगी थी. इसमें कई लोगों को डेढ़ लाख रुपये तक सैलरी दी जाती है.

– एनटीए की ओर से क्यूआर कोड सोल्यूशन के लिए भी टेंडर जारी किया गया था और इसमें कई कंपनियों को हायर किया गया था.

ऐसे में एनटीए कई कंपनियों के टेंडर के जरिए परीक्षा केंद्रों में परीक्षा का आयोजन करता है और परीक्षा के प्रोसेस में काम करने वाले स्टाफ भी बाहर से ही हायर किया जाता है. इनकी नियुक्ति एनटीए की ओर से नहीं करवाई जाती है.

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