आम आदमी को लगा झटका! थोक महंगाई में हुआ इजाफा, 15 महीनों में सबसे ज्यादा बढ़ी

नई दिल्ली:

देश में थोक महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी को झटका लगा है। थोक महंगाई बढ़ी है। भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच खाद्य वस्तुओं और महंगे विनिर्मित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से मई के महीने में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 15 महीने के उच्चतम स्तर 2.61 प्रतिशत पर पहुंच गई। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित मुद्रास्फीति लगातार तीन महीने से बढ़ रही है। अप्रैल में यह 1.26 प्रतिशत और मई 2023 में यह शून्य से 3.61 प्रतिशत नीचे रही थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ” मई 2024 में मुद्रास्फीति बढ़ने का मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों के विनिर्माण, कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस, खनिज तेल और अन्य विनिर्माण उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रही।”

इतनी बढ़ी महंगाई
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मई में 15 महीने के उच्चतम स्तर पर रही है। इसका पिछला उच्चतम स्तर फरवरी 2023 में देखा गया था, जब थोक मुद्रास्फीति 3.85 प्रतिशत थी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मई में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 10 महीने के उच्च स्तर 9.82 प्रतिशत पर पहुंच गई। मई में सब्जियों की महंगाई दर 32.42 प्रतिशत रही, जो एक महीने पहले अप्रैल में 23.60 प्रतिशत थी। इसी तरह प्याज की महंगाई दर 58.05 प्रतिशत, जबकि आलू की महंगाई दर 64.05 प्रतिशत रही। दालों की महंगाई दर मई में 21.95 प्रतिशत रही।

हालांकि मई में थोक मुद्रास्फीति की वृद्धि इस महीने के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों के विपरीत है। इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार मई में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 4.75 प्रतिशत पर आ गई जो पिछले 12 महीनों का सबसे निचला स्तर है।

ब्याज दरों को रखा स्थिर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ही ध्यान में रखता है। आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में लगातार आठवीं बार ब्याज दर को यथावत रखने का फैसला किया था। बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता ने कहा कि देश में भीषण गर्मी के कारण खाद्य मुद्रास्फीति भी ऊंची बनी रहने का अनुमान है। मानसून की प्रगति भविष्य में खाद्य मुद्रास्फीति की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।इसके अलावा वैश्विक धातु कीमतों में उछाल विनिर्माण श्रेणी में मुद्रास्फीति बढ़ने का कारण बना। विनिर्मित उत्पादों में मुद्रास्फीति मई में 0.78 प्रतिशत थी, जो अप्रैल में शून्य से नीचे 0.42 प्रतिशत थी।

कच्चे माल की लागत बढ़ी
बार्कलेज की अर्थशास्त्री श्रेया सोढानी ने कहा कि विनिर्माण के लिए मूल्य सूचकांक (जिसका डब्ल्यूपीआई में सर्वाधिक 64 प्रतिशत भारांक है) में लगातार चौथे महीने वृद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि कंपनियों की कच्चे माल की लागत बढ़ रही है। ईंधन एवं बिजली क्षेत्र में मुद्रास्फीति 1.35 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 1.38 प्रतिशत से मामूली कम है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ”जून 2024 में अभी तक वैश्विक जिंस की कीमतों में मासिक आधार पर गिरावट आई है।इससे महीने में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति में उछाल पर काबू पाने में मदद मिलेगी और प्रतिकूल आधार का मुकाबला किया जा सकेगा। कुल मिलाकर इक्रा का अनुमान है कि जून 2024 में कुल थोक मुद्रास्फीति मामूली रूप से बढ़कर तीन प्रतिशत हो जाएगी।”

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