गुजरात HC ने कहा- ‘महाराज’ 1862 मानहानि केस पर आधारित नहीं, उधर उज्जैन में विरोध प्रदर्शन

आमिर खान के बेटे जुनैद खान की डेब्‍यू फिल्‍म ‘महाराज’ की रिलीज को लेकर जहां गुजरात हाई कोर्ट में शुक्रवार को भी सुनवाई होनी है, वहीं अब इसके ख‍िलाफ हिंदू संगठन भी प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को हाई कोर्ट ने जहां फिल्‍म देखने के बाद इस पर फैसला सुरक्ष‍ित रखते हुए रिलीज पर अंतरिम रोक बरकरार रखी है, वहीं उज्‍जैन में वैष्‍णव संप्रदाय ने इसे सनातन धर्म के ख‍िलाफ बताकर विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने फिल्‍म को हिंदू धर्मगुरुओं और देवी-देवताओं को कलंकित करने वाला बताया है। हालांकि, कोर्ट में जस्‍ट‍िस संगीता विसेन ने मौख‍िक टिप्‍पणी करते हुए कहा कि यह फिल्‍म ना तो किसी किताब और ना ही सच्‍ची घटना पर आधारित लग रही है।

गुजरात उच्च न्यायालय ने गुरुवार को OTT प्‍लेटफॉर्म ‘नेटफ्लिक्स’ पर ‘महाराज’ की रिलीज पर अंतरिम रोक एक और दिन बढ़ा दी। अदालत ने पाया कि फिल्‍म 1862 के मानहानि मामले या निर्माता यशराज फिल्म्स द्वारा जिस किताब का हवाला दिया है, उस पर आधारित नहीं है। जस्‍ट‍िस संगीता विसेन ने फिल्म देखने के एक दिन बाद सुनवाई के दौरान कहा, ‘फिल्म कहती है कि यह एक सच्ची घटना पर आधारित है, जिसके कारण मानहानि का मामला सामने आया। लेकिन यह न तो किसी किताब और ना ही मुकदमे पर आधारित है। फिल्‍म में कोर्ट ट्रायल को 20 मिनट से कम समय के लिए दिखाया गया है।’

13 जून को रिलीज होने वाली थी जुनैद खान की ‘महाराज’
इससे पहले बुधवार को, हाई कोर्ट ने कहा था कि वह न्याय के हित में फिल्म देखने के लिए तैयार हैं। यह फिल्‍म 14 जून को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली थी। लेकिन 13 जून को ही इस पर अंतरिम रोक लगा दी गई। हाई कोर्ट में वैष्णव पुष्टिमार्गी संप्रदाय के अनुयायियों ने याचिका दायर की है।

उज्‍जैन में वैष्‍णव संप्रदाय का विरोध प्रदर्शन
दूसरी ओर, गुरुवार को उज्‍जैन में फिल्‍म के ख‍िलाफ सड़कों पर प्रदर्शन हुए हैं। इसे वैदिक सनातन हिंदू धर्म को भटकाने और हिंदू धर्म के धर्म गुरुओं को खलनायक के रूप में चित्रित करने की मानसिकता से बनाई गई बताया गया है। श्री वल्लभ वैष्णव मंडल, महिला मंडल और युवा मंडल ने उज्जैन के खाराकुआं थाने पर फिल्‍म के ख‍िलाफ प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा है। समाजसेवी विट्ठल नागर और आनंद पुरोहित ने बताया कि ‘महाराज’ में सनातन धर्म और उसके समावेशी भगवान विष्णु के अनुयायी वैष्णववाद के आचार्य श्री के साथ ही, सनातन हिंदू धर्म के वैष्णववाद और युवाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है।

कोर्ट में याचिकाकर्ता ने दिया आईटी एक्‍टर 2021 का हवाला
बहरहाल, इन सब के बीच गुजरात हाई कोर्ट में शुक्रवार को भी सुनवाई होगी। अदालत में याचिकाकर्ताओं ने फिल्म के कुछ अंशों में ‘निंदनीय और अपमानजनक’ बताया है। आरोप है कि फिल्म की रिलीज से ‘पुष्टिमार्गी संप्रदाय’ के खिलाफ नफरत और हिंसा की भावना भड़काने की संभावना है, जो आईटी एक्‍ट, 2021 के तहत आचार संहिता का उल्लंघन होगा।’

वकील बोले- अभ‍िव्‍यक्‍त‍ि की आजादी, बदनाम करने का लाइसेंस नहीं
याचिकाकर्ताओं के वकील म‍िहिर जोशी ने गुरुवार को कोर्ट में तर्क दिया कि फिल्म विवादित मुकदमे पर आधारित है। जबकि यशराज फिल्म्स ने तर्क दिया कि फिल्म गुजराती लेखक सौरभ शाह की 2013 में प्रकाश‍ित किताब पर आधारित है। वकील म‍िहिर जोशी ने अपनी दलील में कहा कि कानून ओटीटी प्‍लेटफॉर्म और फिल्‍ममेकर्स को आचार संहिता नियमों का पालन करने के लिए बाध्य करता है। धार्मिक विविधता, सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखना अनिवार्य करता है। ‘अभ‍िव्‍यक्‍त‍ि और रचनात्‍मकता की आजादी’ का मतलब यह नहीं है कि आपको किसी की बदनामी करने का लाइसेंस मिल गया है।

जज संगीता विसेन ने कहा- आप जिरह करना चाहते हैं तो कीजिए
इस पर जस्‍ट‍िस संगीता विसेन ने मौख‍िक टिप्पणी की कि उन्‍होंने फिल्‍म देखी है और यह ना तो किताब और ना ही मानहानि केस पर आधारित है। इसके बाद म‍िहिर जोशी ने कहा कि वह इस बात का फैसला अदालत पर छोड़ हैं कि फिल्म धर्म को बदनाम करती है, उसका अपमान करती है या उसके लिए अपमानजनक है। जोशी ने कहा कि अगर नेटफ्लिक्स और यशराज फिल्म्स यह तर्क दे रहे हैं कि उनकी फिल्‍म सच्ची घटनाओं पर आधारित है, तो वह इस संबंध में पूर्व के न्यायिक मिसालों पर बहस करना चाहेंगे। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि याचिकाकर्ता इस पर और जिरह करना चाहते हैं। इसलिए रिलीज पर अंतिरम रोक बढ़ाते हुए अब मामले की सुनवाई शुक्रवार को भी होगी।

‘महाराज’ पर क्‍यों मचा है बवाल, क्‍या है 1862 का मानहान‍ि केस
‘महाराज’ को साल 1862 के मानहानि के मामले की सुनवाई और फैसला ब्रिटिश जजों के फैसले पर आधारित बताया गया है। यह मामला धार्मिक नेता जदुनाथजी ने समाज सुधारक करसनदास मूलजी के खिलाफ दायर किया था। जदुनाथजी पुष्टिमार्गी संप्रदाय के नेताओं में से एक थे। उन्होंने यह केस तब दायर किया जब मूलजी ने अपने साप्ताहिक समाचार पत्र में एक लेख लिखकर दावा किया था कि धार्मिक नेता ने अपनी महिला अनुयायियों के साथ यौन संबंध बनाए थे। वो पुरुष अनुयायियों की पत्नियों को सेक्स के मजबूर कर अपनी भक्ति दिखाने के लिए कहते थे। ब्रिटिश अदालत ने इस याचिका को तब खारिज कर दिया था।

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