इमरजेंसी, संविधान की बात.. पीएम मोदी ने यूं नहीं किया है इनका जिक्र, ये 24 का सबक है

नई दिल्ली

18 वीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरुआत हो गई। लोकसभा के भीतर सोमवार विपक्षी दल खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसद कुछ बताने की कोशिश कर रहे थे। सांसदों को देखकर ऐसा लगा कि जो बात चुनावों के दौरान उनकी ओर से बताने की कोशिश हुई वह उसे चुनाव बाद भी जारी रखे हुए हैं। विपक्षी दलों के सांसद संविधान की कॉपी लेकर संसद पहुंचे थे। चुनाव के दौरान भी विपक्षी दलों की ओर से यह कहा गया कि बीजेपी वाले सत्ता में लौटे तो संविधान बदल देंगे। आरक्षण खत्म कर देंगे। चुनाव में बीजेपी को नुकसान भी हुआ खासकर यूपी में। यूपी में सपा ने 37 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। कांग्रेस-सपा गठबंधन को कुल 43 सीटें मिलीं। इस बार के लोकसभा चुनाव में सपा देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इसका असर भी आज लोकसभा में दिखा जब सपा सांसदों को सदन में बैठने के लिए पहली लाइन मिली। विपक्षी दल एक ओर जहां संविधान की कॉपी के साथ संसद पहुंचे थे तो वहीं सत्र की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने 25 जून का खास जिक्र किया।

आपातकाल का पीएम मोदी ने किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बात की जानकारी है कि इस चुनाव में हुआ क्या। विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर अटैक कर कर रहा है। शायद प्रधानमंत्री मोदी को भी यह बात पता थी कि विपक्ष किस तैयारी के साथ आज आया हुआ है। तभी उन्होंने सत्र की शुरुआत के ठीक पहले मीडिया को संबोधित करते हुए ऐसी बात कह दी जो कांग्रेस को नागवार गुजरी। प्रधानमंत्री ने इमरजेंसी को लोकतंत्र पर लगा काला धब्बा करार देते हुए कहा कि इसकी 50वीं बरसी के मौके पर देशवासी यह संकल्प लें कि भारत में फिर कभी कोई ऐसा कदम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा।

पीएम मोदी ने संविधान का किया खास जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की नई पीढ़ी इस बात को कभी नहीं भूलेगी कि उस समय कैसे देश के संविधान को पूरी तरह नकार दिया गया था, देश को जेल खाना बना दिया गया था और लोकतंत्र को पूरी तरह दबोच दिया गया था। उन्होंने कहा आपातकाल के ये 50 साल इस संकल्प के हैं। गौरव के साथ हमारे संविधान की रक्षा करते हुए… भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करते हुए… देशवासी ये संकल्प करेंगे कि भारत में फिर कभी कोई ऐसी हिम्मत नहीं करेगा जो 50 साल पहले की गई थी और लोकतंत्र पर काला धब्बा लगा दिया गया था। देश में 25 जून, 1975 को आपातकाल घोषित किया गया था और यह 21 मार्च, 1977 तक जारी रहा। इस अवधि को नागरिक स्वतंत्रता के निर्मम दमन के तौर पर देखा जाता है। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस कदम का विरोध करने वाले नेताओं को गिरफ्तार किया गया था।

50 साल पहले का आपातकाल, क्या बोली कांग्रेस
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 50 साल पहले के आपातकाल का जिक्र किया, लेकिन पिछले 10 वर्षों के उस ‘अघोषित आपातकाल’ को भूल गए जिसका जनता ने इस लोकसभा चुनाव में अंत कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को उम्मीद थी कि संसद सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नीट और दूसरी परीक्षओं में पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलेंगे, लेकिन उन्होंने मौन साध लिया। खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी अपने रस्मी संबोधन में आज जरूरत से ज्यादा बोले। इसे कहते हैं, रस्सी जल गई, बल नहीं गया। वहीं विपक्ष के प्रदर्शन पर राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संविधान पर हमला स्वीकार्य नहीं है इसलिए हमने संविधान की प्रतियां पकड़ी हुई हैं।

संसद के भीतर आगे भी जारी रहेगा टकराव
पहले दिन संसद परिसर के नजारे को देखकर इस बात के पूरे आसार हैं कि यह सत्र काफी हंगामेदार होगा। इंडिया गठबंधन भले ही विपक्ष में है लेकिन उसकी ओर से यह बार-बार कहा जा रहा है कि हार पीएम मोदी की हुई है। लोकसभा चुनाव नतीजों से कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों का उत्साह काफी बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी को भी पता है कि वह विपक्ष के निशाने पर हैं। आज उनकी ओर से जिन बातों का जिक्र किया गया वह ऐसे ही नहीं था। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद यह पहला सत्र है और आने वाले वक्त में नतीजों का असर समय-समय पर दिखाई देगा इससे कोई इनकार नहीं कर सकता।

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