आषाढ़ मास का कृष्ण पक्ष 13 दिन का दुर्योग काल ..देश दुनिया में अमंगलकारी घटनाओं के संकेत.

हिंदू ज्योतिष के मतानुसार एक पूर्णिमा से अमावस्या तक या अमावस्या से पूर्णिमा के बीच के समय को एक पक्ष कहा जाता है, जिसमें चंद्रमा की कलाएं क्रमशः घटती और बढ़ती रहती हैं। सूर्य और चंद्रमा की कोणीय दूरी के बढ़ने से तिथियों का निर्माण होता है। एक पक्ष में सामान्यत: 15 तिथियां होती हैं लेकिन चूंकि चंद्रमा की गति कभी सामान नहीं रहती है, इस कारण से कभी एक तिथि का क्षय हो जाता हैं पर वर्षों बाद ऐसी संभावना बनती है की किसी पक्ष में 13 तिथियां आ जाएं तो उसे ‘विश्वघस्र पक्ष’ कहा जाता है, जो की अति ‘अशुभ’ माना जाता है। इस वर्ष आषाढ़ महीने में 22 जून से शुरू होने वाले कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा और चतुर्दशी तिथि का क्षय हो रहा है, जिसके चलते यह पक्ष 13 दिनों में समाप्त होगा। इस 13 दिनों के अशुभ पक्ष का प्रभाव अगले कुछ महीनों में प्राकृतिक आपदाओं और बड़ी राजनैतिक उथल-पुथल के रूप में सामने आ सकती हैं

13 दिन के अशुभ पक्ष से मिलने वाले संकेत
वर्ष 2010 के मई महीन में वैशाख शुक्ल पक्ष में भी 13 दिनों का पक्ष था, जिसके कुछ महीनों के भीतर ही मध्य पूर्व के कई देशों में भ्रष्ट्राचार विरोधी जनांदोलनों से कई सरकारें गिर गई थीं। मिस्र, लीबिया में सत्ता परिवर्तन हुए थे तथा भारत और पाकिस्तान में भी भ्रष्टाचार विरोधी बड़े जन-आंदोलन हुए थे। इसके बाद वर्ष 2021 के सितंबर महीने में भी एक बार 13 दिनों का पक्ष पड़ा था, जिसके प्रभाव से आगे चलकर रूस और यूक्रेन में सीमा विवाद बेहद बढ़ गया था और रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर युद्ध थोप दिया था, जो कि अब तक चल रहा है। वर्ष 2021 में पड़े 13 दिनों के पक्ष के प्रभाव से पूरी दुनिया में महंगाई का प्रकोप बढ़ा था। आइए देखें इस वर्ष जून-जुलाई में पड़ रहे इस 13 दिन के अशुभ पक्ष का क्या असर देश-दुनिया पर रह सकता है।

असामान्य वर्षा से होगी जन-धन की हानि
22 जून को भारतीय समय के अनुसार पूर्णिमा तिथि सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर शुरू हुई थी, तब मिथुन लग्न उदय हो रहीं थी। आषाढ़ मास की पूर्णिमा की इस पक्ष कुंडली में लग्न में सूर्य के साथ शुभ ग्रहों बुध और शुक्र का होना तथा सूर्य से पिछली राशि में गुरु का गोचर करना मेदिनी ज्योतिष के ग्रंथों के अनुसार अच्छी वर्षा का योग है। मिथुन राशि से प्रभावित बंगाल में भारी वर्षा से अगले कुछ हफ्तों में कई स्थानों पर बाढ़ की स्थिति भी पैदा हो सकती है। वृषभ राशि से प्रभावित बिहार और झारखंड में भी जुलाई के महीने में भारी वर्षा से जन-धन की हानि हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में 29 जून को चंद्रमा के जल तत्व की राशि वृश्चिक राशि में आने के बाद से मानसून जोरदार तरीके से बरसेगा। लेकिन मेष राशि में चल रहे मंगल पर शनि की दृष्टि के चलते दक्षिण भारत के कुछ स्थानों पर वर्षा में कुछ कमी रह सकती है। वर्तमान में गुरु वृषभ राशि में अतिचारी यानि तेज गति से गोचर कर रहे हैं और आगामी 29 जून को शनि कुंभ राशि में वक्री होने वाले हैं। मेदिनी ज्योतिष के ग्रंथों के अनुसार, बड़े ग्रहों की यह चाल असामान्य वर्षा और भूकपं के साथ-साथ कुछ राजनीतिक उथल-पुथल का भी संकेत दे रहे हैं. भारत में नीट परीक्षा को लेकर आंदोलन चलेगा और सुप्रीम कोर्ट कुछ अहम फैसले ले सकता है. पार्लियामेंट में भी अनेक मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच तना तनी बानी रहेंगी और यह समय के साथ बढ़ती नजर आयेगी.

ब्रिटेन और फ्रांस के चुनावों में होगी सत्ताधारी दलों की हार.
आगामी 4 जुलाई को होने वाले ब्रिटेन के चुनावों में कन्सेर्वटिव पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की हार हो सकती है। भारतीय मूल के ऋषि सुनक ने मई के दूसरे सप्ताह में समयपूर्व चुनावों की घोषणा कर सबको चौंका दिया था पर 22 जून से 5 जुलाई के बीच बेहद अशुभ 13 दिनों का पक्ष बड़े-बड़े नेताओं के सिंहासन को गिराने की क्षमता रखा है। ब्रिटेन की इस वर्ष की हिंदू नववर्ष की कुंडली में कन्या लग्न उदय हो रहीं हैं, जिसमे दशम भाव स्वामी बुध अशुभ स्थिति में अष्टम भाव में होकर शनि की तीसरी दृष्टि से पीड़ित है। इस अशुभ योग के चलते ऋषि सुनक की कन्सेर्वटिव पार्टी की चुनावों में हार हो सकती है और लगभग 14 वर्ष के बाद लेबर पार्टी की सत्ता में वापसी होगी।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी अभी हाल ही में यूरोप संघ के चुनावों में अपनी पार्टी के बुरे प्रदर्शन के बाद और दक्षिण पंथी दलों की उभार को देखते हुए समय से 3 वर्ष पूर्व अपने देश की पार्लियामेंट के सदस्यों की चुनाव की घोषणा कर दी है। 30 जून और 7 जुलाई को होने वाले यह फ्रांस के चुनाव भी 13 दिनों के पक्ष में फंस गए हैं। मकर लग्न की कुंडली में इमैनुएल मैक्रों राहु में सूर्य की अशुभ दशा में चल रहे हैं, जो कि उनकी पार्टी की इन चुनावों में हार का संकेत हैं। यूरोप के इन दो बड़े देशों में उदारवादी दलों की हार का असर भारत पर भी पड़ेगा। भारत को आगे चलकर फ्रांस और ब्रिटेन के साथ व्यापारिक समझौतों में कठिनाई का सामना करना पड सकता है।

प्राकृतिक आपदा का बन रहा है योग.
13 दिनों के पक्ष के चलते आगामी जुलाई और अगस्त के महीनों में पहाड़ो पर भूस्खलन, बदल फटने और भूकंपन से जन-धन की हानि का योग बन रहा है, 1 जुलाई से 17 अगस्त तक उत्तर भारत, ईरान और पाकिस्तान में प्राकृतिक आपदाओं और भूकंप का दुर्योग बन रहा है। 28 जुलाई से 17 अगस्त के बीच में मंगल के रोहिणी नक्षत्र को पीड़ित करने के समय असामान्य वर्षा से उत्तर भारत और पश्चिम भारत में बाढ़ का खतरा हो सकता है.
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सुभाष सक्सेना
ज्योतिष आचार्य.

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