CM से लेकर DM तक की बैठक का नतीजा सिफर, 21 दिन के अंदर बिहार के सहरसा में गिरा 13वां पुल

सहरसा:

बिहार में बुधवार को एक और छोटा पुल ढह गया। राज्य में पिछले 21 दिनों में इस तरह की यह 13वीं घटना है। सहरसा जिले के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) ज्योति कुमार ने बताया कि हमें अभी सूचना मिली है कि महिषी गांव में ऐसी घटना घटी है। यह एक छोटा पुल या पुलिया हो सकता है। जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारी वहां पहुंच रहे हैं। हम घटना के बारे में और जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। एडीएम ने बताया कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान कई जिलों में एक दर्जन से अधिक पुलों और पुलियों के ढहने पर राज्य सरकार ने 15 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है।

सीएम नीतीश ने दिया निर्देश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले हफ्ते संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक के बाद संबंधित अधिकारियों को राज्य के सभी पुराने पुलों का सर्वेक्षण करने और उन पुलों की पहचान करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, जिनकी तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को राज्य में पुलों या पुलिया के लिए अपनी-अपनी रखरखाव नीति तुरंत तैयार करने को भी कहा था। ध्यान रहे कि बिहार में लगातार पुल गिरने की घटनाएं हो रही हैं। पिछले महीने 18 जून, को अररिया जिले में बकरा नदी पर बना पुल गिर गया। उसके चार दिन बाद 22 जून को सिवान जिले में गंडक नदी पर बने पुल के गिरने की खबर आई। 23 जून को पूर्वी चंपारण और 27 के साथ 30 जून को किशनगंज में पुल के धंसने की खबर सामने आई। हद तो तब हो गई, जब सारण और सिवान जिले में एक ही दिन में पांच पुल के गिरने की खबर मिली।

पुल पर सियासत तेज
पुल गिरने की घटना पर राजनीति शुरू हो गई। बिहार सरकार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने आरजेडी कार्यकाल पर इसका आरोप लगाया। वहीं दूसरी ओर नीतीश के करीबी मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि तेजस्वी यादव के पास ये विभाग था। जांच कराई जा रही है। उसके बाद तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखकर बिहार सरकार को चैलेंज दिया। तेजस्वी ने कहा कि एक भी पुल बता दें, जो उनके कार्यकाल में बना हो। कुल मिलाकर पुल को लेकर जहां विपक्ष सत्ता पक्ष पर हमलावर रहा। वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसका आरोप विपक्ष पर लगाता रहा। हालांकि, सिवान जिले के लहलादपुर में 20 साल पुराना पुल ध्वस्त हो गया था। इस पुल का निर्माण 2004 में हुआ था। इस पर 22 लाख की लागत आई थी। सिवान में एक दिन में गिरने वाले 6 पुलों में से 4 पुल लालू यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल के बने हुए थे।

पुल गिरने पर राजनीति
इन घटनाओं के बाद बिहार सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई थी। तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा था कि 4 जुलाई यानी आज सुबह बिहार में एक पुल और गिरा। कल 3 जुलाई को ही अकेले 5 पुल गिरे जिसे लेकर अभी तक 12 पुल ध्वस्त हो चुके है। उसके अलावा आरजेडी के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा था कि तमाम पुल एनडीए सरकार के कार्यकाल में बना है। इसके लिए पूरी तरह नीतीश कुमार की सरकार जिम्मेदार है। ये लोग जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है। उसके बाद सम्राट चौधरी का जवाब आया था। उन्होंने कहा था कि सरकार ने पुल गिरने की घटना को गंभीरता से लिया है। एक-एक पल का रिपोर्ट इकट्ठा किया जा रहा है। किसने पुल बनवाया था, किसके काल में बना था और उसके लिए जिम्मेदार कौन हैं। जो कोई भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, सहरसा में पुल गिरने की घटना के बाद दोबारा सवाल उठने लगे हैं कि इन घटनाओं को लेकर हुई बैठक का कोई सटीक परिणाम नहीं निकला है।

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