कांग्रेस का रुख देख बिहार में टूटेगा महागठबंधन? सांसद तारिक अनवर नहीं समझ पा रहे पार्टी की रणनीति

पटना

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार ने देश की सियासत में भूचाल की स्थिति पैदा कर दी है। ‘इंडिया’ ब्लॉक के खत्म होने की मुनादी इसके प्रमुख घटक आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने तो पहले ही कर दी थी। हरियाणा के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भी इस पर मुहर लगा दी। महाराष्ट्र में महायुति के बिखरने के भी संकेत मिलने लगे हैं। बिहार में महागठबंधन भी बिखर जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के तेवर से तो ऐसा ही लग रहा है। अचरज तो इस बात को लेकर भी है कि बिहार कांग्रेस के नेता भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के रुख को देख कर कन्फ्यूज हो गए हैं।

तारिक अनवर क्यों हुए कन्फ्यूज?
बिहार के कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने सोशल मीडिया पर अपने कन्फ्यूजन का जिक्र किया है। वे लिखते हैं- ‘कांग्रेस को अपनी राजनीतिक रणनीति को स्पष्ट करने की जरूरत है। उन्हें तय करना होगा कि वे गठबंधन की राजनीति करेंगे या अकेले चलेंगे। साथ ही, पार्टी के संगठन में मूलभूत:म परिवर्तन करना भी जरूरी हो गया है।’

बिहार में कांग्रेस के तीन सांसद हैं। उनमें तारिक अनवर भी शामिल हैं, जिन्हें पार्टी की रणनीति समझ में नहीं आ रही। दरअसल यह स्थिति हरियाणा के बाद दिल्ली में कांग्रेस के स्टैंड को देख कर पैदा हुई है। बिहार में इसी साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। गठबंधन की जगह कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के कारण बिहार में भी कांग्रेस की इसी रणनीति का अनुमान लगाया जा रहा है।

बिहार में कांग्रेस कितनी सीटें मांग रही?
बिहार में कांग्रेस महागठबंधन का हिस्सा है। उसके अलावा वामपंथी पार्टियां और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) भी अब महागठबंधन का हिस्सा है। पशुपति कुमार पारस की पार्टी रालोजपा का आकर्षण भी महागठबंधन के प्रति बढ़ा है। माना जा रहा है कि दो नए साथियों को एडजस्ट करने और वाम दलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली सीपीआई (एमएल) को ज्यादा सीटें देने के लिए आरजेडी कांग्रेस की सीटों में कटौती की तैयारी कर रही है। यह बात कांग्रेस को रास नहीं आ रही। कांग्रेस पिछली बार की तरह इस बार भी 70 सीटों की मांग कर रही है। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने दो डेप्युटी सीएम की शर्त भी रखी है।

राहुल गांधी के भी बदले तेवर
आरजेडी ने अभी तक खुल कर तो कुछ नहीं कहा है, लेकिन राहुल गांधी के तेवर को देखते हुए उसे भी अनुमान लगाने में मुश्किल हो रही है कि महागठबंधन में कांग्रेस रहेगी या दिल्ली-हरियाणा की तरह बिहार में भी एकला चलेगी। बिहार में जाति सर्वेक्षण आरजेडी की बड़ी उपलब्धि रही है। इस बार विधानसभा चुनाव में आरजेडी अपनी इस उपलब्धि को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। राहुल गांधी लगातार जाति सर्वेक्षण पर सवाल उठाते रहे हैं। वे इसे फेक और गलत पैरामीटर पर मानते हैं। राहुल की नजर में कांग्रेस शासित तेलंगाना का माडल बढ़िया है। कांग्रेस के एकला चलने का यह एक संकेत माना जा रहा है।

एनडीए एकजुट दिखता है
महागठबंधन के अग्रणी दल आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव अपनी अलग यात्रा कर रहे। वाम दल सीपीआई (एमएल) अलग कार्यक्रम कर रहा है। वीआईपी नेता मुकेश सहनी अभी सिर्फ बयान तक ही सीमित हैं। दूसरी ओर एनडीए की पार्टियां जिलों में साझा कार्यक्रम कर अटूट एकता प्रदर्शित कर रही हैं। तेजस्वी यादव को पिछले चुनाव के परफार्मेंस को देखते हुए इस बार तो कामयाबी की पक्की उम्मीद है। पर, विपक्ष का बिखरा-बिखरा प्रयास कितना कारगर होगा, यह चुनाव में ही पता चलेगा।

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