कहीं चीन के कर्ज के जाल में तो नहीं फंस रहा मालदीव?

नई दिल्ली

मालदीव में रविवार को होने जा रहे चुनाव में अगर मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को जीत मिलती है तो यह देश की वित्तीय हालत पर और दबाव बनाएगी, क्योंकि मौजूदा सरकार ने चीनी समर्थित आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में तेजी लाई है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि चीन से लिए जाने वाला कर्ज मालदीव के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, जबकि यामीन इन दावों को खारिज करते हुए नजर आ रहे हैं।

बेल्ट ऐंड रोड से कर्ज का जाल
यामीन के नेतृत्व में मालदीव के चीन के करीब गया है जो कि पारंपरिक सहयोगी भारत के लिए चिंता का विषय है। इस दौरान चीन अपने बेल्ट ऐंड रोड (बीआरआई ) परियोजना के तहत सड़कों, ब्रिजों और अंतरराष्ट्रीय के निर्माण में वित्तीय मदद देता रहा है। चीन का बेल्ट ऐंड रोड प्रॉजेक्ट मंगोलिया से लेकर मोटेंनेग्रो तक लगभग 70 देशों में फैला हुआ है।

लेकिन श्री लंका में एक बंदरगाह पर चीनी प्रभुत्व और विभिन्न देशों की समस्याओं ने इस बात की चिंता बढ़ा दी है कि बीआरआई परियोजना चीनी परिधि में लाने के लिए कर्ज के जाल की तरह है। हालांकि, चीन इन आरोपों का खंडन करता है।

उधर, यामीन जहां दूसरी बार 5 साल की सरकार बनाने की कोशिश में हैं जबकि उनके मुख्य विरोधी आतंकवादी गतिविधियों से लेकर सरकार को गिराने की कोशिश के तहत जेल में हैं। इसने मालदीव के बाहर वोट की वैधता को लेकर संदेह पैदा किया है। मालदीव एक छोटा सा देश है जो कि मुख्यतः पयर्टन पर निर्भर है वह बीआरआई में शामिल उन देशों में है जो सबसे अधिक खतरे की जद में हैं। वॉशिंगटन डीसी स्थित थिंक-टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डिवेलपमेंट का यही मानना है।

सेंटर का अनुमान है कि चीन ने मालदीव को करीब 1.3 अरब डॉलर का कर्ज दिया है जो कि इसकी वार्षिक जीडीपी का एक चौथाई हिस्सा है। निर्वासित प्रधानमंत्री मोहम्मद नाशीद चीन के साथ डील पर बातचीत करना चाहते हैं और उन्होंने जून में रॉयटर्स को बताया कि यह कर्ज 2.5 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। सेंटर फॉर ग्लोबल डिवेलपमेंट के स्कॉट मॉरिस कहते हैं कि चीन कर्ज देकर प्रभुत्व की स्थिति में आ गया है। मॉरिस ने कहा, ‘आपको सोचना होगा कि खराब हालत में क्या होगा- उस स्थिति में किसी बुलाया जाएगा। अन्य ऋणदाताओं की तरह चीन उस तरह के स्टैंडर्ड से बंधा हुआ नहीं है।’

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच और मूडी मालदीव को सब-इन्वेस्टमेंट ग्रेड देते हैं और विश्व बैंक तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का मानना है कि अगर खर्चे ऐसे ही बरकरार रहे तो स्थिति और खराब होने की संभावना है। मूडी ने जुलाई में रैंकिंग निगेटिव कर दी थी और आधारभूत संरचनाओं में खर्चे को चिंता की वजह बताई थी। रेटिंग एजेंसी की अनुष्का शाह कहती हैं, ‘उनका व्यापक आधारभूत संरचनाओं का कार्यक्रम है और इसी के तहत वे कर्ज ले रहे हैं।’

वहीं, फिच ने मई में स्टेबल रेटिंग दी थी, लेकिन कर्ज को लेकर इसने भी आगाह किया था। हालांकि, यमीन सारी चिंताओं को खारिज करते हैं। उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि मालदीव कर्जों को चुका लेगा। हम इतना विदेशी निवेश ला रहे हैं जो कि देश ने पहली बार देखा है।’

राजनीतिक खतरा
फिच के मुताबिक, मालदीव की अर्थव्यवस्था पिछले 5 सालों से 6 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है जिसकी वजह पर्यटन और निर्माण में तेजी है। लेकिन दोनों ही एजेंसियों ने फरवरी में निवेशकों से सतर्क रहने की अपील की थी जब सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक बंदियों को यामीन की इच्छा के विरुद्ध रिहा किया था, जिसने राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। इसके कारण चीन और संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने पयर्टकों को यहां न आने को लेकर आगाह किया था। अनुष्का शाह ने कहा, ‘हम अपनी रेटिंग में राजनीतिक खतरे को भी निष्पक्षता से शामिल करते हैं। राजनीतिक तनाव नीतियों को प्रभावित करता है और जिससे पर्यटन क्षेत्र में भी इसका कुछ प्रभाव पड़ सकता है।’

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