Wednesday , September 23 2020

पाकः वादा पूरा करेंगे या IMF से मदद मांगेंगे इमरान

इस्लामाबाद

पाकिस्तान में एकबार सरकार बना लेने के बाद पीटीआई चीफ इमरान खान के पास अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए काफी कम वक्त होगा। क्योंकि देश के नए प्रधानमंत्री के सामने कई आर्थिक चुनौतियां होंगी। विशेषज्ञों की मानें तो उन्हें इन चुनौतियों से तेजी से निपटना होगा। नई सरकार को आने वाले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बेलआउट की मांग करनी पड़ सकती है। अब देखना होगा कि इमरान चुनावी वादे के अनुसार, इस्लामिक वेलफेयर स्टेट बनाते हैं या आईएमएफ से मदद की मांग करते हैं।

भुगतान संतुलन बना रोड़ा
पाकिस्तान भुगतान संतुलन के संकट के कगार पर है, जो इसकी मुद्रा की स्थिरता और इसके कर्ज चुकाने की क्षमता के लिए खतरा है। पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान में बजट घाटा तेजी से बढ़ रहा है जो कि जीडीपी का 10 प्रतिशत है। वहीं, तेल की बढ़ती कीमतों के कारण आयात तेजी से बढ़ा है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, जुलाई 2017 से मार्च 2018 के बीच देश के आयात बिल का 70 प्रतिशत हिस्सा मुख्यतः ऊर्जा, मशीनरी और धातु से संबंधित रहा है। इस बीच निर्यात में थोड़ी से वृद्धि हुई है।

बढ़ती महंगाई
कार्यवाहक सरकार की तरफ से पेश हालिया आंकड़े के मुताबिक, आयात-निर्यात अंसुतलन के कारण देश का फॉरन करंसी रिजर्व करीब 10.3 अरब डॉलर तक सिकुड़ गया है। जबकि दिसंबर से लेकर अब तक मुद्रा का चार बार संकुचन हुआ है, जिसके कारण महंगाई बढ़ी है। पूर्व वित्त मंत्री हाफिज पाशा ने बताया, ‘हमने पिछले चार-पांच सालों से पागलों की तरह उधार लिया है, तो अब वक्त लौटाने का है। लेकिन हमारे पास… रिजर्व नहीं है।’ पाकिस्तान 1980 के दशके के आखिरी सालों से लेकर अब तक आईएमएफ के पास लगातार गया है। पिछली बार यह 2013 में गया था, जब इस्लामाबाद का कर्ज 6.6 अरब डॉलर हो गया था। कराची स्थित कंसल्टिंग फर्म इनसाइट सिक्यॉरिटीज के जीशान अफजल बताते हैं, ‘आज देश को कम से कम 12 अरब डॉलर की जरूरत है।’ अगर आईएमएफ इसकी मंजूरी देता है तो यह पाकिस्तान को अब तक सबसे बड़ा बेलआउट होगा।

कैसे बनेगा इस्लामिक वेलफेयर स्टेट
इमरान ने चुनाव प्रचार के दौरान इस्लामिक वेलफेयर स्टेट का वादा किया था, लेकिन इस योजना के बनते ही खत्म होने की संभावना है। इस योजना के तहत स्वास्थ्य और शिक्षा पर बड़ी राशि खर्च करने की जरूरत है। फाइनैंशल टाइम्स से गुरुवार को बातचीत में संभावित वित्त मंत्री माने जा रहे असद उमर ने कहा, ‘हमारे पास कुछ सप्ताह होंगे, महीने नहीं।’ उन्होंने ट्वीट करते हुए मीडिया से कहा कि सारे विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि नई सरकार सभी सरकारी कंपनियों के निजीकरण पर विचार कर रही है जिसमें पाकिस्तान इंटरनैशनल एयरलाइन्स भी शामिल है।

आईएमएफ बेलआउट की राह मुश्किल
पाकिस्तान ने अब तक पुराने कर्ज नहीं लौटाए हैं, जो कि इसे आगे फंड मिलने की राह को मुश्किल बनाएगा। वहीं, पाकिस्तान में यह डर भी है कि इस बार आईएमएफ बेलआउट 2013 की तुलना में ज्यादा कठोर होगा, इसकी वजह पाकिस्तान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंध है, जो कभी इस्लामाबाद का सबसे बड़ा दानदाता रहा है। अमेरिका ने हाल ही में यह चेतावनी दी है कि वह आईएमएफ द्वारा पाकिस्तान को दिए जाने वाले फंड पर करीब नजर बनाए रखेगा कि कहीं यह इसका इस्तेमाल चीन को कर्ज चुकाने में तो नहीं कर रहा, जिसने बेल्ट ऐंड रोड पहल के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के लिए पाकिस्तान को अरबों रुपये दिए हैं।

व्यापार संतुलन और विदेशी निवेश
उधर, व्यापार संतुलन के लिए इमरान आयात को घटाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन पोरस बॉर्डर और स्मगलिंग नेटवर्क वाले इस देश में ये उपाय कभी सफल नहीं हो पाए। इमरान विदेशी निवेश में सुधार की भी कोशिश करेंगे। इमरान का कहना है कि उनके भ्रष्टाचार रोधी अभियान और क्लीन गवर्मेंट से देश की छवि विदेशों में सुधारेगी, जो कि निवेश को आकर्षित करेगी। वहीं, इमरान ने घरेलू मोर्चे पर भी बदलाव का संकल्प लिया है। उनका कहना है कि सरकार कर राजस्व में प्रभावशाली रूप से मजबूती लाएगी।

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