Tuesday , September 22 2020

पाक की भलाई को चीन से दोस्ती तोड़ेंगे इमरान?

नई दिल्ली

पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे इमरान खान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। चीन के डिवेलपमेंट प्लान के तहत लोन लेनेवाले देशों को लेकर अमेरिका का रवैया काफी सख्त है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बेलआउट हासिल करने में उन्हें काफी मुश्किल आएगी। अगर पाकिस्तान को यह बेलआउट पैकेज नहीं मिलता है तो फिर देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर कर पाना भी आसान नहीं होगा। आपको बता दें कि अमेरिका के 16 सेनेटरों ने ट्रंप प्रशासन से अनुरोध किया है कि अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा उनदेशों को बेलआउट देने से रोका जाए जिन्होंने चीन से लोन लिए हैं।

इमरान खान ऐसे समय में सत्ता पर काबिज हो रहे हैं जब पाकिस्तान को तत्काल वित्तीय मदद की दरकार है। अब अमेरिका के रवैये को देखते हुए इमरान खान को चीन से मदद और IMF बेलआउट में से किसी एक को चुनना होगा। माना जा रहा है कि IMF पाकिस्तान से यह मांग कर सकता है कि वह विदेश खासतौर से चीन से पैसे लेना पूरी तरह बंद कर दे। उधर, खान ने चीन को भी आश्वासन दिया है कि वह 62 अरब डॉलर के CPEC प्रॉजेक्ट में पेइचिंग द्वारा किए जा रहे निवेश पर सकारात्मक रुख अपनाएंगे।

अमेरिकी सेनेटरों ने विदेश और वित्त मंत्रियों को पत्र लिखा है जिसमें सीधे तौर पर पाकिस्तान, श्री लंका और जिबूती का जिक्र किया गया है, जिन्होंने चीन से अरबों डॉलर का लोन लिया है लेकिन भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री पॉम्पियो पहले ही इस्लामाबाद को आगाह कर चुके हैं कि IMF बेलआउट का इस्तेमाल चीन के लोन को चुकाने में नहीं होना चाहिए। हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव के कारण ऐसी टिप्पणी की गई है।

सेनेटरों ने दावा किया है कि चीन उधार लेनेवाले देशों की नीतियों पर नियंत्रण के लिए कर्जे बांट रहा है। खबरें हैं कि पाकिस्तान जल्द ही IMF से 12 अरब डॉलर (करीब 825 अरब रुपये) के पैकेज की मांग कर सकता है। कहा यह भी जा रहा है कि घाटे की भरपाई ही नहीं पाकिस्तान इस पैसे का इस्तेमाल चीन पाक आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिए मिले लोन को चुकाने में कर सकता है।

हालांकि पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि IMF के पैसे का चीन के लोन को चुकाने में इस्तेमाल करने की उसकी कोई मंशा नहीं है। आपको बता दें कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है, ऐसे में उसे तत्काल वित्तीय मदद चाहिए। अब खान के सामने चुनौती यह है कि वह IMF से पैसा लें या चीन से।

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