Wednesday , October 21 2020

‘रिलायंस के बारे में मुझसे नहीं, दैसॉ से पूछो’ : ओलांद

नई दिल्ली

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के राफेल डील से जुड़े बयान को लेकर हुए विवाद में नया मोड़ आ गया है। न्यूज एजेंसी एएफपी का कहना है कि जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद से पूछा गया कि क्या रिलायंस और दैसॉ को साथ काम करने को लेकर भारत की तरफ से कोई दबाव था तो ओलांद ने कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। एएफपी की मानें तो ओलांद ने कहा कि सिर्फ दैसॉ ही इस बारे में कोई टिप्पणी कर सकती है।

एएफपी का कहना है कि ओलांद ने कहा कि रिलायंस को चुनने में फ्रांस की कोई भूमिका नहीं है। भारत में इस मामले पर राजनीति लगातार गरम होती जा रही है। विपक्षी पार्टियों ने पीएम मोदी पर देश की जनता को धोखा देने का आरोप लगाया था। बता दें कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा था कि राफेल सौदे के लिए भारत सरकार ने अनिल अंबानी की रिलायंस का नाम प्रस्तावित किया था और दैसॉ एविएशन कंपनी के पास दूसरा विकल्प नहीं था।

ओलांद ने कहा, ‘भारत की सरकार ने जिस सर्विस ग्रुप का नाम दिया, उससे दैसॉ ने बातचीत की। दैसॉ ने अनिल अंबानी से संपर्क किया। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। हमें जो वार्ताकार दिया गया, हमने स्वीकार किया।’ ओलांद की यह बात सरकार के दावे को खारिज करती है जिसमें कहा गया था कि दैसॉ और रिलायंस के बीच समझौता एक कमर्शल पैक्ट था जो कि दो प्राइवेट फर्म के बीच हुआ। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।

ऐसे में रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर इस मामले में स्थिति स्पष्ट की है। अपने बयान में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के बयान के बाद उपजा विवाद बेवजह का है। इसमें कहा गया कि फ्रांस के बयान को पूरी तरह समझने की जरूरत है। फ्रांस की मीडिया ने डील में शामिल पूर्व राष्ट्रपति के करीबियों को लेकर सवाल पूछा था, इसके बाद ही ओलांद ने कहा था कि रिलायंस का नाम भारत सरकार की तरफ से आया था।

रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सरकार ने पहले भी यह बात कही है और फिर से अपनी पूर्व की स्थिति को दोहरा रही है कि रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में सरकार कोई हाथ नहीं है। ऑफसेट पॉलिसी की घोषणा पहली बार 2005 में हुई थी, इसके बाद कई बार इसे रिवाइज भी किया गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के बयान संबंधी रपट में कहा गया है कि भारत सरकार ने राफेल में डिसॉल्ट एविएशन के ऑफसेट पार्टनर के रूप में किसी खास निजी कंपनी की तरफदारी की। इसकी जांच की जा रही है।’

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