Saturday , October 24 2020

लद्दाख में गरजा राफेल, चीनी सेना ने तिब्‍बत में दागी किलर मिसाइलें, बरसाए गोले

पेइचिंग

भारत और चीन में जारी भारी तनाव के बीच चीनी सेना पीपल्‍स लिबरेशन आर्मी ने लद्दाख के पास अपने इलाके में रात में हमले का व्‍यापक युद्धाभ्‍यास किया है। इस अभ्‍यास के दौरान चीनी तोपों ने जहां गोले बरसाए, वहीं जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का भी परीक्षण किया गया। चीनी सेना के एयर डिफेंस स‍िस्‍टम ने दुश्‍मन के हवाई जहाजों को भी मार गिराने का अभ्‍यास किया।

चीन के सरकारी भोपू ग्‍लोबल टाइम्‍स ने एक वीडियो जारी करके बताया कि तिब्‍बत सैन्‍य कमांड के चीनी सैनिकों ने रात में हमले का व्‍यापक अभ्‍यास किया है। यह अभ्‍यास समुद्र तल से 4500 मीटर की ऊंचाई पर किया गया। इस दौरानी चीनी सेना ने सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, रॉकेट और होवित्‍जर तोपों का इस्‍तेमाल किया। चीनी एयर डिफेंस सिस्‍टम ने फाइटर जेट को मार गिराने का अभ्‍यास किया।

राफेल लद्दाख के आसमान में उड़ान भर रहा
चीन ने यह युद्धाभ्‍यास ऐसे समय पर किया है जब भारत का सबसे आधुनिक फाइटर जेट राफेल लद्दाख के आसमान में उड़ान भर रहा है। सूत्रों के मुताबिक राफेल पायलटों ने अंबाला से लद्दाख तक विमानों को उड़ाया। दरअसल, ये एक प्रैक्टिस के तौर पर किया गया। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि राफेल पायलट वहां के मौसम और वातावरण से परिचित हो जाएं। अगर चीन किसी भी तरह की गुस्ताखी करे और राफेल की जरूरत पड़े तो उसके पायलट इस वातावरण से पहले से ही परिचित हों।

रविवार को रक्षा सूत्रों ने कहा कि सीमा पर कुछ मिराज विमान भी उड़ान भरते देखे गए हैं। वायुसेना ने बीते 10 सितंबर को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित एक समारोह में राफेल विमानों को वायुसेना में शामिल किया था। इससे पूर्व जुलाई के आखिर में फ्रांस से पांच राफेल विमान (Rafale in Ambala) अंबाला पहुंचे थे। मिडएयर रीफ्यूलिंग के बिना 4.5-जनरेशन के राफेल्स की सीमा 780-किमी से 1,650 किमी तक होती है। ये अलग-अलग ऑपरेशन पर निर्भर करता है। इसके अलावा लड़ाकू विमानों को 300 किलोमीटर से अधिक लंबी दूरी के `स्कैल्प ‘एयर-टू-ग्राउंड क्रूज़ मिसाइलों जैसे लंबे स्टैंड-ऑफ हथियारों से लैस किया गया है।

भारत और चीन के बीच आज हो रही बातचीत
वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर चल रहे तनाव के बीच सोमवार को एक बार फिर दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर (Corp Commander Level Talk) की बातचीत हो रही है। यह कोर कमांडर स्तर की छठी वार्ता होगी। खास बात यह है कि इसमें विदेश मंत्रालय का एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होगा। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की यह वार्ता चीन वाले हिस्से मोल्दो में हो रही है। इस वार्ता से भारत कुछ मजबूत हल चाहता है। SCO समिट के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने आश्वासन दिया था कि डिसइंगेजमेंट को लेकर वे गंभीर हैं।

भारत और चीन के विदेश मंत्रियों ने वादा किया था कि पूर्व के समझौतों का सम्मान किया जाएगा। भारत की तरफ से प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई लेह के 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह कर सकते हैं वहीं चीन की तरफ से वार्ता में मेजर जनरल लिउ लिन शामिल होंगे। भारत इस वार्ता में चीन पर तुरंत फिंगर पॉइंट से हटने का दबाव डाल सकता है। अब तक चीन और भारत के बीच की बातचीत बेनतीजा साबित हुई हैं। चीन कहता कुछ और है और कहता कुछ और है। शांति और अपनी सीमा में रहने का आश्वासन देने के बाद भी वह विस्तारवादी नीति से बाज नहीं आ रहा है

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