Wednesday , October 21 2020

अमेरिका-चीन में जंग का खतरा, इस इलाके में रूस भी भेज रहा अपनी सेना

मॉस्को

अमेरिका और चीन में बढ़ती तनातनी के बीच रूस ने भी सैनिकों की तैनाती को बढ़ाने का ऐलान किया है। रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू ने गुरुवार को कहा कि रूस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के जवाब में सुदूर पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। माना जा रहा है कि पूर्वी चीन सागर में स्थित रूस के नेवल बेस व्लादिवोस्तोक पर रूसी सेना की उपस्थिति और बढ़ेगी। इस बेस के जरिए रूस प्रशांत महासागर, पूर्वी चीन सागर, फिलीपीन की खाड़ी के क्षेत्रों में अपनी सैन्य गतिविधियों को अंजाम देता है

रूसी रक्षा मंत्री ने खतरे वाले देशों का नहीं लिया नाम
रूसी रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, सर्गेई शोइगू ने कहा कि पूर्वी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण सैनिकों की तैनाती बढ़ाई जा रही है। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि नए खतरें क्या हैं और पूर्व में इन सैनिकों को कहां तैनात किया जाएगा। लेकिन, विशेषज्ञों ने कहा है कि चीन से लगी सीमा और प्रशांत महासागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव से रूस चिंतित है। इसलिए वह अपने हितों की सुरक्षा के लिए सैनिकों की उपस्थिति को बढ़ा रहा है।

विवादित क्षेत्र में रूस भी बनेगा एक पक्ष
मॉस्को के कार्नेगी सेंटर के विश्लेषक अलेक्जेंडर गब्यूव ने कहा कि रूस यह सुनिश्चित करना चाहता है कि टकराव शुरू होने वाले क्षेत्र में उसके पास पर्याप्त सैन्य क्षमताएं हों। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन के बीच नौसैनिक टकराव हो सकता है। रूस कभी भी रक्षाहीन होकर पूरे मामले को ऐसे ही नहीं देख सकता है। उसे भी इस क्षेत्र में अपनी वायुसेना, थल सेना और नौसेना की ताकत को बढ़ाना होगा।

एक तीर से दो निशाना साध रहा रूस
पूर्वी क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती बढ़ाकर रूस एक तीर से दो निशानों को साध रहा है। एक तरफ जहां वह अपने पारंपरिक दुश्मन अमेरिका को सीधा संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ व्लादिवोस्तोक शहर पर चीन के किए गए दावों को लेकर भी सख्ती दिखा रहा है। अमेरिका इस क्षेत्र में जापान की मदद से अपनी सैन्य उपस्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है। उसके जंगी जहाज साउथ चाइना सी और ईस्ट चाइना सी का चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में चीन और रूस दोनों देश सतर्क हैं।

पुतिन विरोधी आंदोलन को कुचलने की मंशा
रूस के पूर्वी हिस्से में लंबे समय से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं। चीनी सीमा के पास स्थित खाबरोवस्क शहर इस गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। इस शहर से एक स्थानीय राजनीतिक नेता की गिरफ्तारी के खिलाफ हफ्तों तक प्रदर्शन हुए हैं। ऐसे में रूस सेना के दम पर विरोध को कुचलने का काम भी कर सकता है।

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