Thursday , October 29 2020

ताइवान के पास से गुज़रा USS बैरी, अमेरिकी युद्धपोत देख कांपा ड्रैगन

ताइवान

ख़ौफनाक अमेरिकी युद्धपोत जब समंदर का सीना चीर कर गुजरा तो चीन की रीढ़ की हड्डी में झुरझुरी पैदा होने लगी. यूएसएस बैरी नाम का ये गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर जैसे ही समंदर में ताइवान के क़रीब से गुज़रा चीन की हवा खराब हो गई. चीन और भारत के बीच तनातनी तो ख़ैर चल ही रही है. लेकिन अब इसी यूएसएस बैरी को लेकर उसकी अमेरिका से भी ठन गई है.

ताइवान के नज़दीक समुद्री रास्ते से गुज़रे अमेरिकी युद्धपोत ने चीन की त्योरियां चढ़ा दी हैं. गुस्से में आग बबूला चीन ने अमेरिका को ऐसी हरकतों से बाज़ आने की चेतावनी दी है. लेकिन अमेरिका तो अमेरिका ठहरा, उसने भी चीन के इस गुस्से को ज़्यादा तवज्जो ना देते हुए साफ कर दिया है कि ये अमेरिका की रूटीन एक्सरसाइज़ का हिस्सा है और वो आगे भी ऐसा करता रहेगा. करने का मतलब ये कि अमेरिका ने भी इशारों ही इशारों में ड्रैगन से कह दिया है कि हम तो ऐसा ही करेंगे. जो कर सको, वो कर लो.

दरअसल, बीते बुधवार को जब ख़ौफनाक अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस बैरी ताइवान के जलडमरु मध्य से गुज़रा, तो चीन को ये बात काफी नागवार गुज़री. उसने एक बयान जारी कर अमेरिका पर अपनी समुद्री सीमा का उल्लंघन करने का इल्ज़ाम लगाया और कहा कि अमेरिका को ताइवान के इर्द-गिर्द ऐसी हरकतों से बाज़ आना चाहिए.

उधर, अमेरिकी पैसेफिक फ्लीट ने कहा कि ताइवान स्ट्रेट से अमेरिकी युद्धपोत का गुजरना प्रशांत महासागर में स्वतंत्र और बेरोकटोक आवाजाही के हमारे देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. अमेरिकी नौसेना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए आगे भी इस क्षेत्र में युद्धपोतों के नौवहन के अलावा विमानों की गश्त जारी रखेगी.

चीन को शायद उम्मीद थी कि उसकी इस गीदड़ भभकी पर अमेरिका घबरा जाएगा. माफी मांगने लगेगा. लेकिन अमेरिका ने जो जवाब दिया, उसने चीन की फजीहत करा दी. अमेरिका के इस रुख से आगबबूला चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत की पूरी यात्रा पर हमारी कड़ी नजर थी. हमने अमेरिका को आगाह किया है कि वह ऐसी बयानबाजी और कार्रवाई से बाज आए, जो ताइवान जल-डमरू-मध्य में तनाव पैदा करती हो.

गौरतलब है कि 1949 के गृह युद्ध में हार के बाद से ताइवान चीन से एक अलग हिस्से के तौर पर रहा है. ताइवान का अपना झंडा, करेंसी और सेना है. हाल ही में अमेरिका ने ताइवान को संवेदनशील मिसाइल टेक्नोलॉजी समेत तमाम हथियार देने का समझौता किया है. ताइवान को मिल रही इस अंतर्राष्ट्रीय मदद से चीन बुरी तरह खीझा हुआ है. वो ताइवान पर अपना दावा करता है. उसे एक स्वतंत्र देश के तौर पर स्वीकार नहीं करता.

जबकि ताइवान ने पहले ही साफ कर दिया कि उस पर चीन का कोई हक़ नहीं. ऐसे में इन दिनों ना सिर्फ ताइवान के साथ चीन टकराव की हालत में है, बल्कि भारत और अमेरिका से भी उलझ रहा है. पिछले दिनों चीनी दूतावास ने भारतीय मीडिया को एक खत लिख कर ताइवान को अलग मुल्क के तौर पर संबोधित ना करने की बिन मांगी सलाह दी थी.

लेकिन इससे पहले कि भारतीय मीडिया इस पर अपना कोई जवाब देता, खुद ताइवान ने कह दिया कि उसे पूरा यकीन है कि उसके भारतीय दोस्त चीन को दो टूक जवाब देंगे कि तुम भाड़ में जाओ. उधर, व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि वह ताइवान को MQ-9 ड्रोन और एक तटीय रक्षात्मक मिसाइल प्रणाली सहित परिष्कृत सैन्य उपकरण बेचना चाहता है, जबकि त्साई ने कहा है कि द्वीप अपने सैन्य आधुनिकीकरण और असममित युद्ध के लिए अपनी क्षमता में सुधार करना चाहता है.

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