5.5 C
London
Sunday, March 22, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयचेरनोबिल 2.0 की आहट, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोप के सबसे बड़े...

चेरनोबिल 2.0 की आहट, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोप के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र की बिजली कटी

Published on

निकोपोल

यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र में लगी आग के कारण इसकी आखिरी बची ट्रांसमिशन लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। इस कारण परमाणु संयंत्र की बिजली चली गई है। यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा संचालक ने ‘एनर्जोएटम’ यह जानकारी दी। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बिजली बहाल हो गई है या नहीं। संयंत्र की बिजली जाना बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि इसकी आपूर्ति में व्यवधान से शीतलन (कूलिंग) प्रणाली खराब हो सकती है, जो रिएक्टरों के सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक है। एनर्जोएटम ने एक बयान में कहा कि इसका अर्थ यह है कि यूरोप के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र के शेष दो रिएक्टरों का बिजली ग्रिड से संपर्क कट गया है। इससे पहले संयंत्र पर रूसी बलों और यूक्रेन के सैनिकों के बीच संयंत्र पर कब्जे को लेकर जारी लड़ाई में तीन अन्य ट्रांसमिशन लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इस संकट से यूक्रेन में चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना के दोहराने का अंदेशा जताया जा रहा है।

न्यूक्लियर रेडिएशन से इन-इन देशों में मच सकती है तबाही
रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पूर्वानुमान के अनुसार, अगर जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र में दुर्घटना होती है, तो रेडियोधर्मी पदार्थ पोलैंड, जर्मनी और स्लोवाकिया को अपनी चपेट में ले लेंगे। इस रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के एक रिएक्टर से भी 25 फीसदी रेडियोएक्टिव मटेरियल का रिसाव होता है तो पूरा का पूरा स्कैंडिनेविया इससे प्रभावित होगा। स्कैंडिनेविया उत्तरी यूरोप का एक इलाका है, जिसमें डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं।

डीजल जेनरेटर और वाटर पंप बंद नहीं होने चाहिए
रक्षा मंत्रालय ने अपने पूर्वानुमान में कहा कि अगर आपात स्थिति में ज़ापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र के स्टैंडबाय डीजल जेनरेटर और मोबाइल पंप काम करना बंद कर देते हैं तो रिएक्टर गर्म हो जाएंगे। इससे भीषण विस्फोट हो सकता है और हवा में रेडियोएक्टिव पदार्थ रिसने शुरू हो जाएंगे। इनकी मात्रा इतनी ज्यादा होगी कि देखते-देखते ये सैकड़ों किलोमीटर का क्षेत्र कवर कर लेगें। यह इस इलाके से जनसंख्या के बड़े पैमने पर प्रवास का कारण बन सकता है। इससे यूरोप में ऊर्जा संकट की तुलना में अधिक विनाशकारी परिणाम होंगे।

कब हुआ था चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में विस्फोट
26 अप्रैल 1986 को तत्कालीन सोवियत संघ के चेरनोबिल के न्यूक्लियर पावर प्लांट में विनाशकारी धमाका हुआ था। इस हादसे की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धमाके के चंद घंटे में प्लांट में काम करने वाले 32 कर्मचारियों की मौत हो गई। इसके अलावा सैकड़ों कर्मचारी न्यूक्लियर रेडिएशन की वजह से बुरी तरह से जल गए। शुरू में तो सोवियत संघ ने इस हादसे को छिपाने की पूरी कोशिश की। मीडिया कवरेज से लेकर लोगों की आवाजाही को तुरंत रोक दिया गया था। लेकिन, स्वीडन की एक सरकारी रिपोर्ट के बाद तत्कालीन सोवियत संघ ने इस हादसे को स्वीकार कर लिया था। विभाजन के बाद चेरनोबिल शहर यूक्रेन के हिस्से में आ गया।

Latest articles

असम में भाजपा की ताकत का प्रदर्शन, भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भरी हुंकार

विधानसभा चुनाव में पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार...

भोपाल सहित प्रदेशभर में मनाई गई ईद-उल-फितर, मस्जिदों में अदा हुई नमाज

भोपाल: पवित्र महीने Ramadan के 30 रोजे पूरे होने के बाद शनिवार को Eid al-Fitr...

ईरान-अमेरिका टकराव: दोनों देशों ने जताया जीत का दावा, बढ़ा वैश्विक तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान: Donald Trump और ईरान के नेताओं के बीच जारी बयानबाज़ी ने दुनिया की चिंता...

नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा का पूजन, हनुमान चालीसा एवं श्री गुरु गीता का सामूहिक पाठ आयोजित

भोपाल। रायसेन रोड स्थित पटेल नगर के जागृत एवं दर्शनीय तीर्थ स्थल दादाजी धाम...

More like this

असम में भाजपा की ताकत का प्रदर्शन, भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भरी हुंकार

विधानसभा चुनाव में पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार...

ईरान-अमेरिका टकराव: दोनों देशों ने जताया जीत का दावा, बढ़ा वैश्विक तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान: Donald Trump और ईरान के नेताओं के बीच जारी बयानबाज़ी ने दुनिया की चिंता...

ट्रंप की दहाड़: ‘ईरान के साथ कोई सीजफायर नहीं!’ चीन और जापान को लेकर कह दी इतनी बड़ी बात कि मच गई खलबली

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक ताजा बयान इस वक्त पूरी दुनिया में चर्चा...