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Wednesday, May 6, 2026
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चीन ने ताजिकिस्तान में ‘जबरन’ बनाया मिलिट्री बेस, खुलासे ने बढ़ाई भारत-रूस की टेंशन, जिनपिंग का क्या है प्लान?

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बीजिंग

चीन ने ताजिकिस्तान में एक मिलिट्री बेस बनाया है। माना जा रहा है कि चीन ने ऐसा धोखे से किया है। ताजिकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के साथ मिलकर चीन मूल रूप से संयुक्त आतंकवाद विरोधी फैसिलिटी बनाने में लगा था। ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि चीन ने अफगानिस्तान की सीमा से लगे ताजिकिस्तान में एक पूर्ण पैमाने पर सैन्य अड्डा बनाया है। हालांकि चीन और ताजिकिस्तान दोनों ने हाल में ताजिक अफगान सीमा के पास सीक्रेट सैन्य अड्डे से इनकार किया है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के साथ बताया गया था कि चीन ने सीक्रेट सैन्य अड्डे का निर्माण किया है। अफगानिस्तान में बढ़ते सुरक्षा खतरे को देखते हुए चीन का यह बेस महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक 13,000 फीट की ऊंचाई पर सुदूर पहाड़ी इलाके में स्थित चीनी सैन्य अड्डे में ऑब्जर्वेशन टावर और चीन के सैनिक भी तैनात हैं। सूत्रों ने कहा कि कथित आतंकवाद विरोधी अड्डा अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद बनाया गया था और इसके लिए समझौते पर 2021 में हस्ताक्षर किए गए होंगे। ताजिकिस्तान में रूस और भारत दोनों की बड़ी हिस्सेदारी है। मध्य एशिया में विशेषकर अफगान सीमा के निकट ताजिकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के करीब चीन का कोई भी बेस भारत और रूस के लिए टेंशन की बात है।

भारत ने की थी मदद
रूस ने ताजिकिस्तान में अपना सैन्य अड्डा बनाए रखा है। लेकिन भारत ने इस क्षेत्र में आतंकी खतरों से निपटने के लिए ताजिकिस्तान के साथ मिलकर काम किया है। भारत ने ताजिकिस्तान में अयनी एयर बेस का संचालन किया। यहां तक कि सुखोई भी तैनात किया। लेकिन बाद में ये फैसिलिटी बंद कर दी गई। 2002 और 2010 के बीच भारत ने एयर बेस के नवीनीकरण, रनवे को 3200 मीटर बढ़ाने और अत्याधुनिक नेविगेशनल और वायु रक्षा उपकरण स्थापित करने के लिए 70 मिलियन डॉलर का खर्च किया। शीत युद्ध के दौरान अयनी क्षेत्र में सोवियत सेना के लिए प्रमुख अड्डा था।

सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली पोल
टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चीन लगभग एक दशक से दुनिया के सबसे सुदूर कोनों में से एक में बेस बना रहा है। चीन ने 2016 में ताजिकिस्तान के साथ एक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। ताजिकिस्तान में मौजूद चीनी दूतावास ने सोमवार को दावा किया कि उनकी ओर से कोई भी मिलिट्री बेस नहीं बनाया गया है। लेकिन सैटेलाइट तस्वीरें निर्माण की स्थिर गति दिखाती हैं, जिसमें बेस तक जाने के लिए सड़कें भी शामिल हैं। चीन ने अपनी सभी सीमाओं पर अपने सैनिक बढ़ाए हैं। खास तौर पर भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है।

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