नई दिल्ली:
बांग्लादेश चरमरा गया है। शेख हसीना सरकार का पख्तापलट हो चुका है। कई दशक तक देश की कमान अपने हाथों में रखने वाली शेख हसीना अपने ही वतन से भाग चुकी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। पड़ोसी देश में लोकतंत्र ढह गया है। सत्ता सेना के पास आ गई है। तरक्की का दम भरने वाले बांग्लादेश में ऐसे हालात कैसे पैदा हो गए? यह सवाल इसलिए है क्योंकि पिछले चार सालों से बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति GDP (सकल घरेलू उत्पाद) भारत से भी ज्यादा है। ज्यादा प्रति व्यक्ति आय के बावजूद क्यों बांग्लादेशी भारत में अवैध रूप से रोजगार की तलाश में आते रहे हैं। आइए, यहां इसे समझने की कोशिश करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, पिछले चार सालों से बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति GDP भारत से ज्यादा है। प्रति व्यक्ति GDP से पता चलता है कि एक देश में रहने वाले हर व्यक्ति की औसत आय कितनी है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति GDP 2,688 डॉलर है। इसके उलट भारत का 2,411 डॉलर है। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में लोगों की औसत उम्र 74 साल है जबकि भारत में यह 68 साल है। फिर सवाल यह उठता है कि जब बांग्लादेश के लोग भारत से ज्यादा तरक्कीशुदा हैं तो हालात ऐसे क्यों? क्या सिर्फ ग्रोथ और जीडीपी ही विकास का पैमाना है?
तरक्की की राह पर तेजी से बढ़ा है बांग्लादेश
बीते कुछ सालों में बांग्लादेश विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ा है। देश में कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। कई होने वाले हैं। इनमें से कई भारत, रूस और अमेरिका के साथ मिलकर बनाए जा रहे हैं। यह और बात है कि बांग्लादेश की आर्थिक तरक्की का फायदा वहां के ज्यादातर लोगों तक नहीं पहुंचा। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स पर भारी खर्च से जीडीपी तो बढ़ा। लेकिन, इसका असर आम लोगों के जीवन पर नहीं पड़ा। खाने-पीने की चीजों और दूसरी जरूरत की चीजों के दाम बढ़ते गए।
बेशक, बांग्लादेश की औसत कमाई ज्यादा है। लेकिन, वहां नौकरियों की कमी है। इसके अलावा, बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कपड़ा उद्योग पर निर्भर है। भारत में दवा उद्योग और सेवा क्षेत्र जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अच्छे अवसर हैं। भारत में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी सार्वजनिक सेवाओं तक भी बेहतर पहुंच है।
भारत को भी सबक लेने की जरूरत
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन, बांग्लादेश के घटनाक्रम से उसे सबक लेने की जरूरत है। बीते कुछ सालों में भारत में भी रोजगार का मसला काफी चर्चा में रहा है। अर्थशास्त्री जॉबलेस ग्रोथ की बात कहते रहे हैं। भारत की औसत विकास दर भले 7 फीसदी के आसपास है। लेकिन, 136 की ग्लोबल रैंकिंग के साथ प्रति व्यक्ति आय के मामले में हम अभी भी गरीब देश हैं। जी20 ही नहीं BRICS देशों में हम सबसे गरीब हैं। यह स्थिति बदलने की जरूरत है। बांग्लादेश में असंतोष के कारणों में ऊंची बेरोजगारी दर का बड़ा हाथ रहा है। भारत को समय रहते ही स्थिति से निपट लेने की जरूरत है। यह नीतिगत निर्णयों से ही संभव है। भारत के पड़ोसियों का एक के बाद एक फेल होना कतई अच्छा नहीं है। बांग्लादेश से पहले श्रीलंका का भी यही हश्र देखने को मिल चुका है।
