बीजिंग:
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी शनिवार 27 जुलाई को पांच दिवसीय यात्रा पर चीन की राजधानी बीजिंग पहुंची। चीनी मीडिया ने इसकी जानकारी दी है। पद संभालने के बाद मेलोनी की यह पहली चीन यात्रा है। पांच दिवसीय यात्रा के दौरान मेलोनी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात करेंगी। यात्रा की जानकारी देते हुए चीन के सरकारी प्रसारक सीजीटीएल ने वीबो सोशल नेटवर्क पर एक पोस्ट में कहा कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी 27 जुलाई की दोपहर आधिकारिक यात्रा पर बीजिंग पहुंचीं। इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करना एजेंडे में सबसे ऊपर होगा।
मेलोनी की यात्रा के दौरान चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर भी बातचीत होने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी एएफपी ने एक इतालवी अधिकारी के हवाले से बताया है कि मेलोनी ‘साझा हितों के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करने की कोशिश करेंगी।’ अधिकारी ने कहा कि वार्ता टयूक्रेन में युद्ध से शुरू होने वाले अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे के मुख्य मुद्दों’ पर केंद्रित होगी।
बीआरआई की विरोधी रही हैं मेलोनी
मेलोनी की सरकार ने पिछले साल चीन की विशाल बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) से खुद को अलग कर लिया था। इटली चीनी परियोजना में शामिल होने वाला वह इसमें शामिल होने वाला एकमात्र जी7 देश था। प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले मेलोनी ने चीन की परियोजना में शामिल होने को एक गलती बताया था। उन्होंने बीआरआई को विदेशों में चीन के प्रभाव को बढ़ाने की शी जिनपिंग का एक प्रमुख प्रयास कहा था। विश्लेषकों का मानना है कि मेलोनी की यात्रा से रोम को उम्मीद है कि इससे बीआरआई से निकलने के बाद चीन से बिगड़े संबंधों को सुधारा जा सकेगा। इसी साल अक्टूबर में इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला चीन की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं।
चीन से व्यापार में इटली का ज्यादातर आयात
यूरोपीय संघ में इटली चीन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसके साथ ही चीन एशिया में इटली का सबसे बड़ा साझेदार है। दोनों का द्विपक्षीय व्यापार 80 अरब डॉलर है, जिसमें ज्यादातर इटली को चीनी निर्यात है। इटली का डेटा से पता चलता है कि चीन को 2019 में 14 अरब डॉलर के मुकाबले 2022 में 18 अरब डॉलर हुआ, जबकि उसी अवधि में इटली को चीनी निर्यात लगभग दोगुना होकर 34 अरब डॉलर से बढ़कर 62 अरब डॉलर हो गया।
