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Saturday, May 9, 2026
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अरे ये चीन को क्‍या हुआ! भारतीयों के फायदे की करने लगा बात, दे रहा आने की दावत

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बीजिंग:

चीन के नव नियुक्त राजदूत जू फेइहोंग ने भारत की बढ़ती चिंताओं को स्वीकार किया है। उन्‍होंने कहा है कि चीन अधिक भारतीय कंपनियों को अपने बाजार में प्रवेश देकर व्यापार घाटे को कम करने के लिए तैयार है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सालों से भारत के लिए चिंता का विषय रहा व्यापार घाटा वर्ष 2023 में 99.2 अरब डॉलर हो गया। चीन के साथ कुल द्विपक्षीय व्यापार 136.2 अरब डॉलर था। वर्ष 2022 में व्यापार घाटा पहली बार 100 अरब डॉलर से अधिक 101 अरब डॉलर रहा था।

भारत इस संबंध में समय-समय पर अपनी चिंता व्यक्त करता रहा है। चीन पर दबाव डालता रहा है कि वह अपने प्रमुख निर्यात क्षमता वाले क्षेत्रों, अनाज के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी और औषधि क्षेत्रों को भी भारतीय कंपनियों के लिए खोले।

राजदूत के तौर पर अपना कार्यभार संभालने के लिए भारत रवाना होने से पहले फेइहोंग ने चीन के इस रुख को दोहराया कि उसका व्यापार अधिशेष हासिल करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘भारत के व्यापार घाटे के पीछे कई फैक्‍टर हैं। चीन, भारत की चिंता को समझता है। हमारा कभी भी व्यापार अधिशेष हासिल रखने का इरादा नहीं रहा है।’

भारतीय उत्‍पाद खरीदना चाहता है चीन
हाल ही में भारत में चीन के राजदूत नियुक्त किए गए फेइहोंग ने कहा, ‘चीनी बाजार भारत समेत सभी देशों के लिए खुला है। हमने भारतीय उत्पादों को खरीदने के लिए कई व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत भेजे हैं। हम चाहते हैं कि अधिक से अधिक बिक्री योग्य भारतीय उत्पाद चीनी बाजार में आएं। हम चीन अंतरराष्ट्रीय आयात एक्सपो, चीन-दक्षिण एशिया एक्सपो, कैंटन फेयर और अन्य मंचों पर भारत की भागीदारी के लिए अधिक सुविधा देने को तैयार हैं।’

उन्होंने कहा, ‘चीन भारतीय कंपनियों को चीन की बाजार मांगों को पूरा करने और वाणिज्यिक व व्यापार सहयोग की संभावनाओं का लाभ उठाने में भी मदद करने को तैयार है।’

टेंशन के बाद भी व्‍यापार पर नहीं आई है आंच
फेइहोंग बोले, ‘पिछले साल भारत में चीनी राजनयिक मिशनों ने करीब 190,000 वीजा जारी किए। इनमें से 80 फीसदी से अधिक कारोबारी वीजा थे। दोनों तरफ से व्यावसायिक यात्राएं द्विपक्षीय व्यापार के लिए अच्छी हैं। हमें उम्मीद है कि भारत कारोबारी अवसरों के लिए भारत आने वाले चीनी व्यापारियों को और अधिक सुविधा प्रदान कर सकता है।’

पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव होने के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। चीन के सीमा शुल्क विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल दोनों देशों के बीच कुल व्यापार बढ़कर 136.2 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं, इस साल की शुरुआत में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 99.2 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है।

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