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चीन में लॉकडाउन पर थम नहीं रहा जनता का गुस्‍सा, क्‍या बड़ी मुसीबत में फंसने वाले हैं जिनपिंग?

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बीजिंग

चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग दुनिया के कुछ सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार हो चुके हैं। मार्च 2023 में वह अपने तीसरे कार्यकाल की तरफ देख रहे हैं। लेकिन एतिहासिक कार्यकाल शुरू हो, इससे पहले ही उनके देश में जनता उनके खिलाफ प्रदर्शन करने लगी है। जिनपिंग ने राष्‍ट्रीय सुरक्षा के मकसद से एक ऐसी स्थिति तैयार की जिसके बाद जो कोई उनकी या उनकी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की आलोचना करेगा, उसका पता चल जाएगा। लेकिन उनकी यह नीति पूरी तरह से फेल हो चुकी है। जीरो कोविड पॉलिसी की वजह से देश में जमकर उनके खिलाफ गुस्‍सा निकाला जा रहा है और विरोध प्रदर्शन में तेजी आती जा रही है। कड़े से कड़े लॉकडाउन भी चीन के नागरिकों को नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं। चीनी मामलों के जानकारों की मानें तो शायद यह जिनपिंग के अंत की एक शुरुआत भी हो सकती है।

दिसंबर में पहली आवाज
दिसंबर 2019 में कोविड का पहला मामला चीनी डॉक्‍टर ली वेनलियांग की तरफ से सबके सामने लाया गया था। उन्‍होंने ऑनलाइन एक वीडियो पोस्‍ट करके दुनिया को यह बताया कि कैसे चीनी अथॉरिटीज की तरफ से कोविड जैसी खतरनाक बीमारी के मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। तीन हफ्तों तक कोई लॉकडाउन नहीं लगाया गया। कोरोना वायरस से मौत से कुछ ही समय पहले उन्‍होंने मीडिया से एक बड़ी बात कही थी। उन्‍होंने कहा था, ‘कोई भी स्‍वस्‍थ समाज सिर्फ एक आवाज के सहारे नहीं रह सकता है।’

सरकार की सेंसरशिप भी फेल
2020 में जब चीन की सरकार ने कोविड के मामलों से जुड़ी जानकारी पर लगाम लगाने के लिए सेंसरशिप लागू की तो काफी देर हो चुकी थी। डॉक्‍टर ली की मौत के तीन साल बाद और सख्‍त लॉकडाउन के बावजूद कोविड फैलता जा रहा है। जिनपिंग ने जिन उपायों को लॉन्‍च किया था, अब वो जनता के गुस्‍से का शिकार होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर जिस आवाज को दबाने की कोशिशें की जा रही थीं, अब वह सड़कों पर आ गई है।

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के उपाय
पिछले महीने चीन की तरफ से कम्‍युनिस्‍ट पार्टी कांग्रेस से पहले सख्‍त सुरक्षा उपाय लागू कर दिए गए थे। इसके बाद भी जो कुछ चीन में हो रहा है वह असाधारण है। पार्टी कांग्रेस के समय छात्रों और वर्कर्स की तरफ से कई बैनर्स एक पुल पर लहराए गए थे। इनमें लिखा था, ‘ चीन के नागरिक गुलाम नहीं हैं।’ यहां से जिनपिंग को हटाने की मांग तेज होती गई। लोगों ने जिनपिंग को ‘तानाशाह’ और देश का ‘कपटी’ नेता तक कह डाला। शंघाई जहां पर हालात बेकाबू हैं, वहां पर अप्रैल से ही लोगों में गुस्‍सा भड़क रहा था।

वुहान और बीजिंग के अलावा चीन के बड़े शहरों में अब अशां‍ति बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों की मानें तो जिस तरह से जिनपिंग ने आक्रामकता से कोविड के खिलाफ नीति तैयार की और वायरस पर जीत की एक झूठी तस्‍वीर पेश की, उसने न सिर्फ चीन के लोगों को बल्कि दुनिया में मौजूद उसके साथियों को भी हैरान कर दिया।

जिनपिंग की घबराहट बढ़ी
विशेषज्ञों के मुताबिक जिनपिंग सिर्फ यही चाहते हैं कि वह हर उस आवाज को दबा दें जो उनके और पार्टी के खिलाफ उठ रही है। हांगकांग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उनका ‘चाइना ड्रीम’ खतरनाक होता जा रहा है। शिनजियांग से लेकर तिब्‍बत तक चीन के पीड़‍ित मौजूद हैं। मगर जिस तरह से गुस्‍सा बढ़ रहा है, उसने उन्‍हें थोड़ा डरा भी दिया है। उन्‍हें अब अपनी सत्‍ता पर खतरा नजर आने लगा है।

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