मॉस्को
यूक्रेन के साथ चल रही लड़ाई के बीच रूसी सेनाओं ने एक नई रक्षात्मक तकनीक का सहारा लिया है। रूस की सेना ने यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में नई रणनीति के तहत यूक्रेनी सैनिकों को रोकने के लिए मालवाहक रेलगाड़ियों का उपयोग किया गया है। रूस ने एक लंबी ट्रेन श्रंखला तैयार की है। यह ‘जार ट्रेन’ रूस के नियंत्रण वाले कस्बों ओलेनिव्का और वोल्नोवाखा के बीच करीब 30 किलोमीटर तक फैली हुई है। ये पूर्वी यूक्रेन में उसकी सेना के लिए युद्ध की अग्रिम पंक्ति के करीब एक बड़ी बाधा के रूप में कार्य करती है। यूक्रेनी ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस ट्रैकर डीपस्टेट के अनुसार, इस सीरीज में करीब 2,100 मालवाहक गाड़ियां शामिल हैं। यानी इन ट्रेनों को जोड़कर रूस की फौज ने एक दीवार यूक्रेनी सेना के सामने खड़ी कर दी है। इस इंजीनियरिंग संरचना की प्रभावशीलता कितनी होगी, इस पर अभी अनिश्चित बनी हुई है लेकिन इसका शुरुआती उद्देश्य स्पष्ट है कि ये यूक्रेनी रक्षाबलों को रोकने के लिए तैयार की गई है।
अमेरिका स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (आईएसडब्ल्यू) का मानना है कि ये ट्रेन भविष्य में यूक्रेनी हमलों के खिलाफ डिफेंसिव लाइन (रक्षात्मक रेखा) के रूप में काम कर सकती है। आईएसडब्ल्यू रिपोर्ट के अनुसार, मई 2023 और फरवरी 2024 की सैटेलाइट इमेजरी से ओलेनिव्का और वोल्नोवाखा को जोड़ने वाली गाड़ियों की व्यापक लाइन का पता चलता है। रूस ने जुलाई 2023 में इसे असेंबल करना शुरू किया, जो तीव्र संघर्ष वाले क्षेत्र में अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक कदम का संकेत देता है। इसे रक्षा की एक अलग पंक्ति के रूप में माना जा सकता है क्योंकि 30-किलोमीटर लंबे मास मेटल को नुकसान पहुंचाना, हिलाना या उड़ा देना बेहद मुश्किल है। इसे तोड़े बिना उपकरणों की आवाजाही के लिए गलियारा तैयार करना असंभव है।
क्षेत्र में देखी गई है भारी लड़ाई
रूस की इस रेलवे लाइन को बनाने के पीछे की रणनीतिक स्थिति इस इलाके में चल रहे संघर्ष की वजह से है। इस लाइन से चार मील से भी कम दूरी पर डोनेट्स्क क्षेत्र में भारी लड़ाई देखी गई है। इसमें ओलेनिव्का और वोल्नोवाखा महत्वपूर्ण अग्रिम रेखाओं के ठीक पूर्व में स्थित हैं। वहीं सामने के अपेक्षाकृत निष्क्रिय क्षेत्र में जार ट्रेन का निर्माण रूसी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक पूर्वव्यापी उपाय की तरह है। पूर्वी यूक्रेन में रूसी सेना द्वारा ‘जार ट्रेन’ की यह रणनीतिक तैनाती किसी युद्ध में एक अहम बदलाव भी दिखाती है कि कैसे सैन्य इंजीनियरिंग के नवीन और पारंपरिक पहलू बदल रहे हैं।
