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समुद्र में डूब चुकी है टाइटैनिक पनडुब्बी, सभी यात्रियों की मौत … रूसी एक्सपर्ट के दावे से सनसनी

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न्यूयॉर्क

टाइटैनिक का मलबा दिखाने जा रही ओशनगेट एक्सप्लोरेशन की टाइटन पनडुब्बी का चौथे दिन भी कोई सुराग नहीं है। यह पनडु्ब्बी रविवार को उत्तरी अटलांटिक महासागर में गायब हो गई थी। उस समय इस पनडुब्बी में 90 घंठे का ऑक्सीजन बचा हुआ था। इस बीच एक रूसी एक्सपर्ट ने दावा किया है कि ओशनगेट की टाइटन पनडुब्बी समुद्र में डूब चुकी है। यह पनडुब्बी समुद्र की सतह पर मौजूद कीचड़ में फंसी हो सकती है, जिससे रडार से डिटेक्ट करना भी संभव नहीं है। इस दावे के बाद टाइटन पनडुब्बी में सवार पाकिस्तानी अरबपति समेत पांच लोगों के मौत की आशंका बढ़ गई है।

पनडुब्बी की खोजबीन अब भी जारी
टाइटन पनडुब्बी को खोजने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। अमेरिका और कनाडा की नौसेनाओं के अलावा कई एक्सपर्ट्स भी इस खोज अभिया में जुटे हुए हैं। ओशनगेट एक्सप्लोरेशन पनडुब्बी ब्रिटेन के समयानुसार, रविवार सुबह लगभग 4 बजे टाइटैनिक के मलबे से 2000 मीटर की ऊंचाई पर लापता हो गई थी। इस पनडुब्बी को गायब हुए चार दिन हो चुके हैं, ऐसे में आशंका है कि इसका ऑक्सीजन अब खत्म हो चुका होगा। यह पनडुब्बी जब लापता हुई तो सतह से 2000 मीटर की गहराई पर थी। अभी तक इस पनडुब्बी का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

समुद्र तल पर है टाइटैनिक पनडुब्बी
रूसी नौसैनिक विशेषज्ञ इगोर कुर्डिन का मानना है कि यह पनडुब्बी संभवत समुद्र के तल पर मौजूद है। कुर्डिन सेंट पीटर्सबर्ग क्लब ऑफ सबमरीन्स के चेयरमैन के अलावा रूसी नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी और फर्स्ट रैंक कैप्टन हैं। उन्होंने बताया कि अगर यह अब आपातकालीन संदेश नहीं भेज पा रही है तो दुर्भाग्य से यह माना जाना चाहिए कि वह समुद्र तल पर मौजूद है। उन्होंने कहा कि हां, इसका ढांचा ठोस है, लेकिन वह टूटा नहीं है। यह बहुत संभव है कि ऊपर आने के समय बाहरी ढांचे पर दबाव कम हो गया होगा और उसके उपकरणों में पानी भर गया होगा।

टाइटैनिक पनडुब्बी के सभी यात्रियों की मौत का दावा
इस बीच एक और पूर्व पनडुब्बी कमांडर ने दावा किया है कि ओशनगेट की टाइटन पनडुब्बी पर सवार सभी यात्रियों की शायद पहले ही मौत हो चुकी है। पूर्व कमांडिंग ऑफिसर एंडी कोल्स ने कहा कि यात्रियों की मौत हाइपोथर्मिया या कार्बन डाइऑक्साइड के कारण पहले ही हो चुकी होगी। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि पनडुब्बी के पास CO2 को साफ करने और हवा को फिर से रिलीज करने का कोई साधन है। ऐसे में वे पूरी तरह से दम घुटने से पहले ही मर गए होंगे। दूसरी बात यह है कि 3800 मीटर नीचे का पानी अविश्वसनीय रूप से ठंडा है।

ऊपर आने पर भी नहीं बचेगी यात्रियों की जान
कोल्स ने कहा कि अगर पनडुब्बी सतह तक पहुंच भी जाए तो उसमें सवार यात्री हैच को नहीं खोल पाएंगे, क्योंकि वह अंदर से बंद है। उस पनडुब्बी में अब कोई पावर सोर्स या लाइट की व्यवस्था नहीं होगी। अगर उनके पास ऊर्जा होती तो वे सतह पर उसे चलाने की कोशिश करते। आखिर में उन्होंने कहा कि मैं कहूंगा कि आपके पास उन्हें जीवित लाने की 50 फीसदी से भी कम संभावना है, भले ही आपने उन्हें ढूंढ लिया हो।

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