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कनाडा में गायब हुए 20 हजार भारतीय छात्र अब कहां हैं, किस तरह काट रहे जिंदगी? हो गया खुलासा

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कनाडा में पढ़ने गए 20 हजार भारतीय छात्र ‘गायब’ हो गए हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। यहां गायब होने से हमारा मतलब ये नहीं है कि वे सच में गुमशुदा हो गए हैं, बल्कि इन छात्रों ने कॉलेज जाना बंद कर दिया है। ये भारतीय छात्र कनाडा पहुंचने के बाद कॉलेज नहीं जा रहे हैं। कनाडाई सरकार को भी नहीं मालूम है कि स्टूडेंट्स आखिर देश में कहां रह रहे हैं। हालांकि, अब इन भारतीय छात्रों के ठिकाने को लेकर अहम जानकारी सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में गायब होने वाले 20 हजार भारतीय छात्रों में से ज्यादातर ने खुद के खर्चे निकालने के लिए छोटी-मोटी नौकरियां करना शुरू कर दिया है। कुछ ऐसे स्टूडेंट्स रहे हैं, जो सच में पढ़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें नामी यूनिवर्सिटीज में एडमिशन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने कम प्रसिद्ध कॉलेजों में दाखिला लिया। जब वे कनाडा के इन कॉलेजों में पढ़ने पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि ये संस्थान या तो फर्जी हैं या फिर उनके पास छात्रों के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं हैं।

कनाडा के फर्जी कॉलेज में हुआ एडमिशन तो करने लगे जॉब
हरियाणा के पंचकुला के रहने वाले 24 वर्षीय एक छात्र को लग रहा था कि उसने ब्रैम्पटन के एक नामी कॉलेज में एडमिशन लिया है। मगर जब वह पढ़ने के लिए ब्रैम्पटन पहुंचा तो उसे पता चला कि एडमिशन लेटर पर जो एड्रेस दिया गया है, वो एक छोटे ऑफिस का है, जहां कोई क्लासरूम नहीं है। छात्र ने कहा, “उन्होंने मुझे कहा कि क्लास फुल है, इसलिए इंतजार करो। कई हफ्ते बीत गए, फिर मुझे लगा कि ये कॉलेज फर्जी है। अच्छी बात ये रही कि मैंने 12 लाख ट्यूशन फीस में से सिर्फ 4.2 लाख ही दी थी।”

स्टूडेंट हरियाणा के अपने एजेंट से सिर्फ फोन कॉल पर ही बात करता था। एजेंट ने छात्र को समझाया था कि वह अभी सिर्फ 4 लाख रुपये दे और बाकी की फीस वहां पार्ट-टाइम जॉब करके भर दे, ताकि एजुकेशन लोन लेने की जरूरत नहीं पड़े। यही वजह थी कि छात्र ने एक स्थानीय पेट्रोल पंप पर नौकरी करना शुरू कर दिया। अब वह यही कर रहा है और कॉलेज नहीं जा रहा है। कनाडा में कॉलेज के नाम पर फर्जीवाड़े का शिकार हुए ज्यादातर छात्र अब इसी तरह से अपनी जिंदगी चला रहे हैं।

स्टूडेंट वीजा लेकर कनाडा में एंट्री, फिर पढ़ाई की जगह कर रहे जॉब
हालांकि, जहां कुछ छात्रों को फर्जी कॉलेजों की वजह से नौकरी करनी पड़ी है, तो कुछ ऐसे भी स्टूडेंट्स हैं, जो कनाडा में घुसने के लिए स्टूडेंट वीजा सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के उलट कनाडा में एडमिशन के दौरान तुरंत ट्यूशन फीस नहीं देनी होती है। इस वजह से छात्र कुछ फीस देकर स्टूडेंट वीजा के जरिए देश में दाखिल होते हैं और फिर कॉलेज जाना बंद कर देते हैं। वैसे तो ये छात्र पढ़ने के लिए देश में आते हैं, लेकिन फिर यहां पहुंचने पर नौकरी करने लगते हैं।

गुजरात के वलसाड के रहने वाले एक 27 वर्षीय छात्र ने बताया कि उसने कम्युनिटी कॉलेज में एडमिशन के लिए दो साल की 7.5 लाख रुपये फीस दी। कनाडा में मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए ये काफी कम फीस है। आमतौर पर मास्टर्स के लिए इससे तीन गुना ज्यादा फीस देनी पड़ती है। छात्र ने कहा, “मेरे इलाके के बहुत से लोगों ऐसा किया है और मैं भी उनके नक्शेकदम पर चलने लगा। मैं जानता हूं कि ये अवैध है, लेकिन मेरे लिए सिर्फ यही रास्ता था। फिर जिन लोगों ने अच्छे कॉलेजों में एडमिशन भी लिया है, वो भी मेरी तरह ही नौकरी कर रहे हैं। उनके ऊपर तो 25 लाख रुपये से ज्यादा का लोन है।”

फिलहाल ये छात्र दो नौकरियां कर रहा है, जिसमें एक रेस्तरां में वेटर और दूसरी रात के समय फूड डिलीवरी बॉय की है। इससे होने वाली कमाई को वह घर पर भी भेज रहा है। ज्यादातर इस तरह की हरकत करने वाले छात्र गुजरात, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के हैं। इन सभी छात्रों की कहानी बिल्कुल ऐसी है। तेलंगाना के खम्मम के एक 26 वर्षीय छात्र ने सरे के एक कॉलेज में एडमिशन लिया, लेकिन वह क्लास नहीं गया। इसके बजाय, वह अब सात डॉलर प्रति घंटे के नकद वेतन पर एक मोबाइल दुकान में काम करता है। ऐसे ही आंध्र प्रदेश के ओंगोल का 25 वर्षीय युवक टोरंटो में डिलीवरी एजेंट के रूप में काम कर रहा है।

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