बीजिंग
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 और 9 जुलाई को रूस की राजधानी मॉस्को के दौरे पर पहुंच रहे हैं। यूक्रेन में साल 2022 में रूस के हमले के बाद से पीएम मोदी पहली बार मॉस्को जाएंगे। वहीं, तीसरी बार कार्यकाल संभालने के बाद पीएम मोदी का ये पहला विदेशी द्विपक्षीय दौरा है। पश्चिमी एक्सपर्ट इस बात से हैरान है कि ऐसे समय में जब दुनिया के देशों ने रूस के राष्ट्रपति से दूरी बनाई है, भारतीय प्रधानमंत्री ने रूस को अपने दौरे को क्यों चुना है। वहीं, चीनी एक्सपर्ट इसे बिल्कुल भी हैरान करने वाला कदम नहीं मान रहे। बल्कि चीनी विशेषज्ञ से पीएम मोदी के दौरे की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इसे भारत की कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं।
चीन की सूचाऊ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर विक्टर गाओ ने चीनी सरकारी मीडिया आउटलेट ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में कहा, भारत के प्रधानमंत्री के रूस दौरे को अमेरिका या पश्चिमी देशों को आश्चर्य के रूप में नहीं देखना चाहिए। प्रोफेसर विक्टर गाओ ने कहा कि 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने खुद को अमेरिका और पश्चिमी देशों के अच्छे दोस्त के रूप में दिखाने की कोशिश की है, तो दूसरी तरफ रूस का पारंपरिक दोस्त और सहयोगी भी साबित किया है।
भारत की विदेश नीति को बताया स्मार्ट
प्रोफेसर गाओ ने आगे कहा कि भारत का ये स्मार्ट कदम है, क्योंकि वह वही कर रहा है तो नई दिल्ली के लिए फायदेमंद है। उन्होंने बताया कि भारत और रूस के बीच मजबूत रक्षा साझेदारी है। लेकिन एक चीज जिस पर दोनों सबसे ज्यादा फोकस कर रहे हैं, वह ऊर्जा क्षेत्र है। कच्चे तेल के मामले रूस भारत का सबसे बड़ा निर्यातक बनकर सामने आया है और दोनों साथ काम करते हैं, तो भारत को मध्य एशिया के रास्ते रूस से सीधी प्राकृतिक गैस मिल सकती है। रूस से गैस मिलना औद्योगीकरण के साथ ही भारत की निर्माण क्षमता के विस्तार के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
रूस में भारतीय युवाओं के लिए नौकरी
चीनी एक्सपर्ट ने कहा कि बिना दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा नीति के आप औद्योगीकरण को बढ़ाने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने रूस में बड़े पैमाने पर भारतीयों के लिए काम के मौके मिलने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो भारत से बड़ी मात्रा में युवा पुरुष और महिलाएं रूस में काम के अच्छे अवसर हासिल कर सकते हैं। ऐसा कई सालों तक होने वाला है क्योंकि रूस की आबादी में तेज गिरावट देखी गई है। यूक्रेन युद्ध के चलते रूस ने बड़ी संख्या में युवाओं को खोया है। ऐसे में रूस के लिए जल्द ही उन देशों की तरफ देखने की जरूरत पड़ेगी जो उसके लिए कुशल कामगार उपलब्ध करा सकते हैं।
