Tuesday , October 27 2020

अगले हफ्ते सिंधु समझौते पर भारत-पाक में बात

नई दिल्ली

भारत की पाकिस्तान की इमरान खान सरकार के साथ पहली अधिकारिक मुलाकात अगले हफ्ते ही इस्लामाबाद में होने वाली है। स्थायी सिंधु आयोग (पीआईसी) की इस मुलाकात में दोनों देशों के अधिकारी सिंधु जल मामले को लेकर चर्चा करेंगे। भारत इस मुलाकात को ‘सिंधु जल समझौते’ के तहत जरूरी बता रहा है। इस बैठक का समय भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बैठक इमरान खान के पीएम पद संभालने के ठीक एक हफ्ते बाद हो रही है। भारत के दल का नेतृत्व पीके सक्सेना करेंगे, वहीं पाक की तरफ से सैयद मेहर अली शाह को इसकी आयुक्त बनाया गया है।

इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान भारत से बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाने की बात कह चुका है। वहीं भारत सीमापार आतंकवाद के मामले को लेकर इस पर पूरी सावधानी बरत रहा है। पीएम मोदी ने इमरान खान को लिखे बधाई पत्र में पाकिस्तान के साथ सार्थक और रचनात्मक बातचीत के लिए कहा था।

दोनों तरफ से ‘सार्थक’ बातचीत की इच्छा जाहिर किए जाने के बावजूद व्यापक बातचीत को लेकर कोई चर्चा नहीं है। हालांकि भारत यह बात कई बार साफ कर चुका है कि जब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ काम कर रहे आतंकी समूहों पर कोई कार्रवाई नहीं करता तब तक कोई व्यापक बातचीत संभव नहीं है।

हालांकि दोनों देशों ने इस बात से भी अभी तक इनकार नहीं किया है कि अगले महीने यूएनजीए (यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली) के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अपने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी से मुलाकात कर सकती हैं।हालांकि जम्मू कश्मीर में किशनगंगा (330 मेगावॉट) और रातले (850 मेगावॉट) पनबिजली परियोजनाओं के भारत के डिजाइन पर सवाल उठाते हुए पाकिस्तान ने पिछले साल भी वर्ल्ड बैंक का रुख किया था। किशनगंगा प्रॉजेक्ट झेलम की सहायक नदी, जबकि रातले प्रॉजेक्ट चेनाब नदी से जुड़ा है। संधि में इन दोनों नदियों के साथ सिंधु नदी को पश्चिमी नदियों के तौर पर परिभाषित किया गया है। इन नदियों के पानी के इस्तेमाल पर पाकिस्तान को किसी बंदिश का सामना नहीं करना पड़ता है। भारत इस मुद्दे पर निरीक्षण के लिए एक निष्पक्ष एक्सपर्ट की मांग करता रहा है।

क्या है पीआईसी?
पर्मानेंट इंडस कमीशन (पीआईसी) में दोनों देशों के अधिकारी शामिल हैं। ये अधिकारी हर साल मुलाकात करते हैं। यह बैठक हर साल दोनों देशों में होती है। बैठक 1960 के सिंधु जल समझौते का हिस्सा है। समझौते में सिंधु समेत सतलुज, ब्यास, रावी, झेलम और चेनाब नदी का जिक्र है। इसके तहत भारत को सिंधु, झेलम और चेनाब नदी का पानी पाकिस्तान को देना होता है।

क्या होगा मुलाकात में?
जहां सिंधु जल समझौते के तहत दोनों देशों के अधिकारियों को साल में एक बार मिलना है, वहीं यह मुलाकात इस साल में दूसरी है। इससे पहले मार्च में नई दिल्ली में यह बैठक हुई थी। बैठक में पाकिस्तान ने 850 मेगावॉट के हायड्रॉलेक्ट्रिक प्रॉजेक्ट, 1000 मेगावॉट के पकल दुल प्रॉजेक्ट, लोअर कलनाई प्रॉजेक्ट, जो चेनाब नदी में पर बनाए जा रहे हैं, को समझौते का उल्लंघन बताया था।

बता दें कि दोनों देशों के इस संधि पर सवाल उठने लगे थे। सीमा पार से होने वाले आतंकवादी हमलों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। भारत में संधि के तहत नदियों से मिलने वाले पानी की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने का फैसला किया गया था। विश्व बैंक का कहना है कि हमने दोनों देशों के बीच विवाद के समाधान के लिए काम किया है।

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