केंद्र सरकार सख्‍त, पलूशन फैलाने पर दर्ज होगा क्रिमिनल केस

नई दिल्ली

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण से नाराज केंद्र सरकार ने कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। केंद्र पलूशन पर लगाम लगाने के लिए दिए गए निर्देशों का पालन न कराने वाली सरकारी एजेंसियों और पलूशन फैलाने वालों पर आपराधिक केस करने का फैसला किया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली-एनसीआर में पलूशन रोकने के उपाय करने के लिए बनाई गई टीमों की बैठक के बाद यह फैसला लिया है।

बैठक में बताया गया कि ज्यादातर एजेंसियां पलूशन पर लगाम लगाने के उपायों पर गंभीरता से अमल नहीं कर रही हैं। इसके कारण समस्या गंभीर हो रही है। ये टीमें दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद में तैनात की गई हैं। पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि हालात ठीक नहीं हैं। सभी संबद्ध एजेंसियों को संजीदगी से काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि अब 41 की बजाय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 50 टीमें हर शहर पर नजर रखेंगी और नियमों का पालन न कराने वाली एजेंसी के खिलाफ भी आपराधिक केस दर्ज करेंगी। इस बार भी तमाम घोषणाओं के बावजूद ठंड बढ़ने के साथ ही दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण बढ़ने लगा है। उन्होंने बताया कि ये टीमें हफ्ते में कम से कम पांच दिन हर शहर का औचक निरीक्षण करेंगी और जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई करेंगी।

इसके तहत पलूशन के हालात दिखने पर पहले रेड वॉर्निंग जारी की जाएगी और अगले दो दिन तक कोई कार्रवाई न होने पर पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत आपराधिक केस दर्ज कराया जाएगा। केस सीपीसीबी और राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण विभागों में से कोई भी दर्ज करा सकता है। पल्यूशन कम होने पर वॉर्निग की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।

हर्षवर्धन ने कहा कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि कोई एजेंसी या उसके अफसर कितने पावरफुल हैं। अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पल्यूशन पर लगाम लगाने के लिए एक हफ्ते का प्रोग्राम चलाया जाएगा। उन्होंने लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की। पर्यावरण सचिव सीके मिश्रा ने बताया कि पीएम 10 और पीएम 2.5 का स्तर सितबंर 2017 में 215 और 158 था जो इस साल सितंबर में घटकर 116 और 115 रह गया है।

उन्‍होंने बताया कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की शिकायतों में भी कमी आयी है। पंजाब में 2016 में 22259, 2017 में 16265 और 2018 में 7371 शिकायतें दर्ज की गयीं। वहीं हरियाणा में 2016 में 4790, 2017 में 4733 और 2018 में अब तक 3022 शिकायतें दर्ज की गयीं। इस संबंध में डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने कहा, ‘इन तीन वर्षों में पीएम तत्वों के स्तर और पराली जलाने की घटनाओं में कमी जरूर आयी है लेकिन हम महज आंकड़ों के आधार पर मौजूदा स्थिति को संतोषजनक नहीं मान सकते हैं।’

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

RSS के संगठन की PM मोदी से अपील- MSP से कम मूल्य पर खरीद हो गैरकानूनी

नई दिल्ली, किसानों से जुड़े मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक विवाद चल रहा …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
64 visitors online now
1 guests, 63 bots, 0 members
Max visitors today: 195 at 12:10 pm
This month: 227 at 09-18-2020 01:27 pm
This year: 687 at 03-21-2020 02:57 pm
All time: 687 at 03-21-2020 02:57 pm