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कैंसर: जानिए, क्यों डरा रही है UN की रिपोर्ट

नई दिल्ली

कैंसर की बीमारी तेजी से पूरी दुनिया में पांव पसार रही है। यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार इस साल दुनियाभर में 1.8 करोड़ मामले कैंसर के सामने आ सकते हैं, जिसमें 96 लाख लोगों की जान जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर पांच में से एक पुरुष को कैंसर हो रहा है। उधर, भारत में कैंसर रेट तो स्थिर है लेकिन इसके मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इंडियन मेडिकल इंस्टिट्यूशन के शीर्ष शोधकर्ताओं द्वारा किए रिसर्च में खुलासा हुआ है कि 1990-2016 के बीच कैंसर रेट स्थिर रहा है। 2016 में महिला-पुरुषों के बीच सबसे ज्यादा मामले पेट के कैंसर के आए थे, वहीं अब लीवर कैंसर ज्यादा तेजी के साथ फैल रहा है। इसके अलावा ब्रेस्ट कैंसर (8.2%), लंग कैंसर (7.5%) के मामले हैं। भारत में 1990 में कैंसर के 5.5 लाख मामले सामने आए थे, वहीं 2016 में इसकी संख्या 10.6 लाख हो गई। कैंसर दूसरी सबसे बड़ी जानलेवा बीमारी है।

कैंसर पर रिसर्च करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी IARC ने बताया है कि इस साल दुनियाभर में कैंसर के 1.8 करोड़ नए मामले सामने आ सकते हैं और 96 लाख लोगों की इस कारण जान जा सकती है। इसके मुताबिक दुनिया में हर पांच में से एक पुरुष को कैंसर हो रहा है जबकि महिलाओं के मामले में यह अनुपात हर छह में से एक का है। रिपोर्ट में भारत के संदर्भ में क्या कुछ कहा गया है, आइए जानते हैं-

कैंसर से मौतों की संख्या बढ़ी
इंडियन मेडिकल इंस्टिट्यूशन के शोध में यह साफ किया गया है कि देश के पॉप्युलेशन के एज स्ट्रक्चर के कारण कैंसर के वास्तविक मामले बढ़े हैं। लोग अब ज्यादा समय तक जी रहे हैं और यही कारण है कि कैंसर की बीमारी अपेक्षाकृत बुजुर्गों को अपना निशाना ज्यादा बना रही है। कैंसर का सबसे कॉमन प्रकार स्टमक कैंसर है। इसके अलावा लीवर कैंसर सबसे तेजी से फैल रहा है।

भारत में कैंसर के मामले बढ़े
द लेंसेट में छपी स्टडी के अनुसार कैंसर के कारण मृत्यु दर अब भी ज्यादा है। स्टडी के अनुसार शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान नहीं हो पाना इसका बड़ा कारण है। डॉक्टरों के अनुसार इस समय कैंसर से सर्वाइवल रेट 20-30 फीसदी के करीब है। डॉक्टरों ने बताया ज्यादातर मरीज कैंसर के अडवांस्ड स्टेज या फिर तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंचने पर उनके पास आते हैं।

एम्स कैंसर सेंटर के चीफ डॉ जीके रथ ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘अगर कैंसर का पता शुरुआती स्तर पर चल जाए तो 80 फीसदी मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। स्टडी के अनुसार पेट का कैंसर (9%), ब्रेस्ट कैंसर (8.2%), लंग कैंसर (7.5%), कोलन (मलाशय) कैंसर (5.8%), ब्लड कैंसर (5.2%) और सर्वाइकल कैंसर (5.2%) भारतीयों में आम है।

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