Wednesday , October 21 2020

गुजरात: गे प्रिंस की पहल, LGBTQ के बारे में जानेंगे छात्र

अहमदाबाद

एक ओर जहां देश में लेस्बियन-गे-बायसेक्शुअल-ट्रांसजेंडर-क्वीर (एलजीबीटीक्यू) अधिकारों के लिए आंदोलन मुखर है वहीं गे प्रिंस और एलजीबीटीक्यू अधिकारों के कार्यकर्ता मानवेंद्र सिंह गोहिल ने समुदाय विशेष पर दक्षिण एशिया का पहला शैक्षणिक मॉड्यूल पेश किया है। इसका नाम उन्होंने ‘ प्रॉक्लिविटी ऑफ जेंडर: सोशियो-लीगल अप्रॉच टु एलजीबीटीक्यू कम्यूनिटी’ दिया है। यह एक अनिवार्य विषय होगा जो अहमदाबाद की कर्णावती यूनिवर्सिटी में सोमवार को लॉन्च किया गया है।

यूनिवर्सिटी के लॉ ऐंड लिबरल स्टडीज के अंडरग्रैजुएट छात्र इसे पढ़ सकेंगे। इसके अलावा 60 से ज्यादा प्रतिभागी उच्च माध्यमिक स्कूल के छात्र और पीएचडी स्कॉलर्स भी इस कोर्स में हिस्सा होंगे। इस कोर्स के पीछे विचार के बारे में मानवेंद्र बताते हैं, ‘इसके पीछे मकसद संयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देना और थर्ड जेंडर के प्रति सामाजिक स्वीकृति को बढ़ाना है।’

इस कोर्स में भारत में एलजीबीटीक्यू अधिकार आंदोलन का इतिहास, इसकी शुरुआत कैसे हुई, आंदोलनों का अंतर्राराष्ट्रीय संदर्भ, कानूनी अधिकार, आईपीसी की धारा 377 और समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक पहलू वगैरह शामिल होंगे। मानवेंद्र ने आगे बताया कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, एचआईवी, मेडिकल और उम्र संबंधी बीमारियां भी इस कोर्स में सम्मिलित होंगी। वह कहते हैं, ‘इस कोर्स के जरिए हम समुदाय को तथ्यों के साथ पेश करेंगे जिसकी मदद से छात्र इस समुदाय को अच्छी तरह समझ सकेंगे।’

विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता, परिवार, दोस्तों और सामाजिक हलकों सहित अलग-अलग स्तरों पर स्वीकृति की कमी एक मुद्दा है जो अक्सर भेदभाव को जन्म देता है। और कभी-कभी हिंसक और अपमानजनक रूप लेता है। यूनिवर्सिटी में इस कोर्स के संयोजक प्रफेसर श्रुत ब्रह्मभट्ट कहते हैं, ‘एलजीबीटीक्यू लोगों के खिलाफ भेदभाव तेजी से फैल रहा है। उन्हें आधारभूत सुविधाएं जैसे हेल्थकेयर, प्रॉपर्टी में हिस्सा और कई दूसरे अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। इसलिए एलजीबीटीक्यू समुदाय के बारे में छात्रों को पढ़ाने से वह इसके सदस्यों के प्रति संवेदनशील बनेंगे।’

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