Saturday , October 31 2020

गैर सांप्रदायिक ताकतें 2019 के चुनावों के लिए गठबंधन करें : अमर्त्य सेन

कोलकाता

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने रविवार को सभी विपक्षी दलों को एक साथ आने की सलाह दी। उन्‍होंने कहा कि सभी गैर-सांप्रदायिक ताकतों को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के लिये एक साथ आना चाहिए और वाम दलों को उनके साथ शामिल होने में ‘हिचकना’ नहीं चाहिए क्योंकि ‘लोकतंत्र खतरे में है।’

उन्होंने कहा, ‘हमें निश्चित रूप से निरंकुशता के विरुद्ध विरोध जताना चाहिए। हमें निश्चित रूप से उनकी निरंकुश प्रवृत्तियों के खिलाफ लड़ना चाहिए। हमें निश्चित रूप से उन मुद्दों की आलोचना करनी चाहिए जहां हमें गैर-सांप्रदायिक दक्षिणपंथी ताकतों के विरोध की आवश्यकता हो। लेकिन जब बात सांप्रदायिकता से लड़ने की आये तो हमें बिल्कुल अपने हाथ पीछे नहीं खींचने चाहिए, जो आज सबसे बड़ा खतरा बन गया है।’

उन्होंने केन्द्र की बीजेपी सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को ‘महज 31 प्रतिशत वोट मिले और राजनीति में अपने गलत इरादों’ की बदौलत पार्टी सत्ता में आयी। सेन ने यहां के शिशिर मंच सभागार में सवाल-जवाब सत्र के दौरान कहा, ‘वर्ष 2014 में चुनावों में क्या हुआ? एक पार्टी जिसे 55 प्रतिशत सीटें मिलीं, लेकिन वास्तव में उसने कुल मतों का महज 31 प्रतिशत मत पाया… वह सत्ता में आयी…। एक गलत इरादों वाली पार्टी।’

2019 में भाजपा को हराने के लिए बनाया जा सकता है अजेय गठबंधन

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को हराने और भारत को ‘भय के शासन’ से मुक्त कराने के लिए विपक्षी दलों का अजेय गठबंधन बनाया जा सकता है. हालांकि चिदंबरम ने इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया कि गठबंधन में प्रधानमंत्री पद का दावेदार कौन होगा. उन्होंने कहा कि यह पूछना जल्दबाजी होगी. उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले गठबंधन बना लें और चुनाव हो जाए. आप पटकथा लिखे जाने से पहले जवाब जानना चाहते हैं.’’ पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सभी विपक्षी दल जिस सबसे महत्वपूर्ण सवाल पर एकमत हैं, वह है कि भाजपा को हराया जाना चाहिए. चिदंबरम ने कहा, ‘‘इस विषय पर तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार आदि सरीखे कई राज्यों में विचारों में एकरूपता है. यह एकरूपता ही विपक्षी पार्टियों को साथ में लाएगी और राज्यवार गठबंधन बनाये जाएंगे.’’

उन्होंने कहा कि पहली बार हम देश में जनता के बड़े वर्ग में ‘‘डर की भावना’’ देख रहे हैं. चिदंबरम ने कहा, ‘‘दलित डर में रहते हैं, मुस्लिम डर में रहते हैं, महिलाएं डर में रहती हैं, प्रेस डर में है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम स्वीकार्य लोकतांत्रिक अधिकारों और लोकतांत्रिक पदों से दूर जा रहे हैं. यह देश के लिए खतरनाक प्रवृत्ति है. हम आजादी (अंग्रेजों से) चाहते थे क्योंकि हम बिना डर के रहना चाहते थे. और आज देश का बड़ा वर्ग डर में रह रहा है और इसे समाप्त करना होगा.’’

क्या कांग्रेस विपक्ष के गठबंधन में कर्नाटक वाला मॉडल अपनाएगी जहां उसने सबसे बड़ा दल होने के बाद भी मुख्यमंत्री का पद जेडीएस को दे दिया, इस पर पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस को देने की स्थिति में तेलंगाना राष्ट्र समिति और तृणमूल कांग्रेस जैसे कुछ दलों के सहज नहीं होने की खबरों के बारे में पूछने पर चिदंबरम ने कहा कि चुनाव तक इंतजार करना ठीक होगा.

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

एम्स निदेशक ने चेताया- तेज हुई कोरोना की दूसरी लहर, जरूरी हो तभी निकलें

नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
Do NOT follow this link or you will be banned from the site!