Tuesday , September 29 2020

चीन पर नजर, मालदीव संग यूं आगे बढ़ेंगे मोदी, शपथ ग्रहण में हो सकते हैं शामिल

नई दिल्ली

भारत से उतार-चढ़ाव भरे संबंधों के बाद अब पड़ोसी देश मालदीव की सियासी फिजा बदली है। ऐसे में भारत वहां सत्ता संभालने जा रहे नए राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह के साथ संबंधों को दोबारा मजबूत करना चाहता है। मालदीव की जनता और नए राष्ट्रपति को सपॉर्ट करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अगले हफ्ते सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने माले जा सकते हैं। माले जाने से सभी पड़ोसी देशों की यात्रा का पीएम का सर्किट भी पूरा हो जाएगा। उधर, भारत की नजर क्षेत्र में बढ़ते चीन के प्रभाव पर भी है। मालदीव की पिछली सरकार के बारे में माना जा रहा था कि चीन के प्रभाव में आकर ही उसने भारत से संबंधों को अहमियत नहीं दी।

दरअसल, मालदीव ही अकेला ऐसा दक्षिण एशियाई देश है, जहां अब तक मोदी नहीं गए हैं। वैसे, अभी तक उनके दौरे की घोषणा नहीं की गई है लेकिन प्रधानमंत्री की अडवांस टीमें तैयारियों के सिलसिले में पहले ही माले पहुंच चुकी हैं। मोदी का मालदीव दौरा काफी मायने रखता है।

मोदी के माले दौरे के मायने
माले में मोदी की मौजूदगी इस बात का संकेत होगा कि भारत न सिर्फ पुराने मतभेदों को भुलाकर नई सरकार को सपॉर्ट करना चाहता है बल्कि प्रधानमंत्री खुद पहुंचकर सोलिह के प्रति भरोसा जाहिर करना चाहते हैं। पीएम मोदी ने जब सोलिह को बधाई दी थी तभी उन्होंने शपथ ग्रहण के लिए आमंत्रित किया था।

श्री लंका के मैत्रीपाला सिरीसेना की तरह सोलिह भी राजनीति में नए हैं। उन्हें संसद में भी ज्यादा समय नहीं हुआ है। वह MDP के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। सोलिह के लिए चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अब उन्हें दो कट्टर विरोधी नेताओं मोहम्मद नाशीद और मौमून अब्दुल गयूम के बीच संतुलन बनाकर रखना होगा। उधर, पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन विपक्ष में रहने की योजना बना रहे हैं।

माले में बदले सियासी हालात
चुनावों में यामीन की हार और नाशीद के खिलाफ सजा निलंबित किए जाने के बाद मालदीव के सियासी हालात तेजी से बदले हैं। नाशीद वापस माले पहुंच गए हैं, जिससे वह राजनीतिक जमीन फिर से मजबूत कर सकें। जेल से लौटकर गयूम भी देश की सियासत में बड़ी भूमिका के लिए तैयार हो रहे हैं। माले में सूत्रों का कहना है कि सोलिह अपनी सरकार में गयूम की बेटियों को शामिल कर सकते हैं।

भारत को फायदा
भारत मालदीव में अपनी मौजूदगी को फिर से बढ़ाना चाहता है। इसको लेकर कई बैठकें भी हो चुकी हैं। शुरुआत के तौर पर भारत अपने सभी प्रॉजेक्टों को शुरू करना चाहता है जो यामीन ने रोक दिया था। इसमें केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूसरे सरकारी प्रॉजेक्ट ही नहीं भारतीय प्राइवेट सेक्टर द्वारा किए जा रहे काम भी शामिल हैं। दरअसल, पिछली सरकार के समय भारत के प्राइवेट सेक्टर का वहां भरोसा कमजोर हुआ है। मालदीव ने भारतीय कंपनियों को बिजनस की मंजूरी, भारतीय कामगारों को वीजा आदि देने की रफ्तार काफी धीमी कर दी थी। नई सरकार में इसमें फिर से तेजी आ सकती है।

पहले कदम के तौर पर भारत ने इसी हफ्ते मालदीव को इंडियन ओसन रिम असोसिएशन (IORA) में शामिल कराने के लिए मदद की। यह बैठक दक्षिण अफ्रीका में हुई थी। अगला कदम भारत, श्री लंका और मालदीव के बीच इंडियन ओसन त्रिपक्षीय मंच को दोबारा शुरू करने का हो सकता है। दरअसल, यह इलाका भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब चीन यहां अपना प्रभाव बढ़ाने में जुटा है।

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