Saturday , September 19 2020

दिल्ली पहुंचकर किसानों ने वापस ली हड़ताल, अपने गांव लौटेंगे

नई दिल्ली

किसान क्रांति यात्रा लेकर दिल्ली पहुंचे किसानों ने आखिरकार अपना मार्च वापस ले लिया। बुधवार तड़के किसान नेता नरेश टिकैत ने इसका ऐलान किया। मार्च खत्म होने के बाद किसान अपने-अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं। मंगलवार देर रात किसान मार्च को दिल्ली में एंट्री दी गई थी। एंट्री के बाद ये सभी सीधे किसान घाट पहुंचे और वहां जाकर हड़ताल खत्म कर दी।

पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह के स्मारक किसान घाट पहुंच किसानों ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा, ’23 सितंबर को शुरू हुई ‘किसान क्रांति यात्रा’ किसान घाट पहुंचकर खत्म हो गई है। चूंकि दिल्ली पुलिस ने हमें राजधानी में घुसने की इजाजत नहीं दी थी इसलिए हमने प्रदर्शन किया था। हमारा मकसद यात्रा को खत्म करने का था जो अब पूरा हुआ। अब हम अपने गांव जाएंगे।’

हालांकि अभी इनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से क्या पहल की गई है, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। बता दें कि मंगलवार को किसानों और पुलिस के बीच काफी हिंसक संघर्ष देखने को मिला। किसानों को दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर रोकने के लिए यूपी और दिल्ली, दोनों राज्यों की पुलिस ने पूरा जोर लगा रखा था। मंगलवार देर रात करीब 12:30 बजे पुलिस ने बैरियर खोल दिए और किसानों को दिल्ली में प्रवेश की इजाजत दे दी।

बता दें कि मंगलवार सुबह करीब सवा 11 बजे किसानों का यह आंदोलन तब हिंसक हुआ जब उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़कर दिल्ली में घुसने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक किसानों ने पत्थरबाजी की, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। पानी की बौछारें छोड़ीं। लाठियां चलाईं। रबड़ की गोलियां भी दागीं। ट्रैक्टरों के तार काट दिए। पहियों की हवा निकाल दी। करीब आधे घंटे तक अफरा-तफरी जैसे हालात में 100 से ज्यादा किसानों को चोंटें आईं, कुछ गंभीर भी हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस के एक ACP समेत 7 पुलिसकर्मी घायल हुए।

ये हैं किसानों की मांगें
– किसान 60 साल की आयु के बाद पेंशन देने की मांग कर रहे हैं।
– पीएम फसल बीमा योजना में बदलाव करने की मांग।
– गन्ना की कीमतों का जल्द भुगतान की मांग।
– किसान कर्जमाफी की भी मांग कर रहे हैं।
– सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में देने की भी मांग।
– किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज मुक्त लोन।
– आवारा पशुओं से फसल का बचाव।
– सभी फसलों की पूरी तरह खरीद की मांग भी की गई है।
– इसके अलावा किसान स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट को लागू करने की भी मांग है।
– गन्ने की कीमतों के भुगतान में देरी पर ब्याज देने की मांग कर रहे हैं।

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