Thursday , October 29 2020

राजनीतिक दलों से पूछे चुनाव आयोग, उनकी पार्टी में कितने बदमाश हैं? – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि जघन्य अपराधों के आरोपियों को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने पर फैसला देना संसद के क्षेत्राधिकार में घुसने जैसा होगा. कोर्ट ने कहा कि वह ‘लक्ष्मण रेखा’ पार नहीं करना चाहता. राजनीति के अपराधीकरण को ‘सड़न’ करार देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि वह चुनाव आयोग को राजनीतिक पार्टियों से यह कहने का निर्देश देने पर विचार कर सकता है कि उनके सदस्य अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का खुलासा करें, ताकि मतदाता जान सकें कि ऐसी पार्टियों में कितने ‘कथित बदमाश’ हैं.

गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोगों को चुनावी राजनीति में आने की इजाजत नहीं देने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बेंच ने ये बातें कही. शीर्ष अदालत ने केंद्र से पूछा कि क्या ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव में पार्टी के चिह्न से वंचित किया जा सकता है?

सीजेआई और जस्टिस नरीमन ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा, ‘क्या हम चुनाव आयोग को सिंबल्स ऑर्डर के तहत एक नियम बनाने का निर्देश नहीं दे सकते, जो अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग द्वारा एक प्रशासनिक फैसला होगा.’ कोर्ट ने पूछा, ‘ऐसे आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को अगर चुनाव लड़ने के लिए टिकट दे भी दिया गया, तो क्या उन्हें पार्टी के चिह्न से वंचित किया जा सकता है?’

भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय बेंच ने यह कमेंट उस वक्त किया, जब केंद्र सरकार से बेंच को बताया कि शक्तियों के पृथक्करण की अवधारणा (Separation of Power) के मद्देनजर सांसदों को अयोग्य करार दिए जाने का मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है.

जस्टिस आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा की सदस्यता वाली बेंच ने कहा, ‘यह (कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत) हर कोई समझता है. हम संसद को कोई कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकते. सवाल यह है कि हम इस सड़न को रोकने के लिए क्या कर सकते हैं.’

बेंच ने कहा, ‘अदालत चुनाव आयोग से कह सकती है कि वह राजनीतिक पार्टियों को ये निर्देश दे कि गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे उम्मीदवारों को न तो टिकट दिया जाएगा और न ही ऐसे निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देंगे.’ इस मामले में दलीलें 28 अगस्त को बहाल होंगी. (एजेंसी इनपुट)

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