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राजनीति के लिए क्यों बेहतर है ‘तीन तलाक’?

नई दिल्ली

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के अध्यादेश को मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल फैसला सुनाते हुए तीन तलाक को असंवैधानिक बताया था। बुधवार रात इस अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई।

कानून क्यों?
सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक या ‘तलाक-ए-बिद्दत’ के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए इस अध्यादेश को लाना जरूरी हो गया था।

अध्यादेश क्यों?
मुस्लिम महिला बिल (तीन तलाक बिल) को पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में पास कर दिया गया, लेकिन राज्यसभा से इसे अनुमति नहीं मिल पाई है। बिल को राज्यसभा में लाया भी नहीं जा सका। राज्यसभा में बीजेपी के पास बहुमत नहीं है।

अध्यादेश के साथ समस्या
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2017 में कहा था कि अध्यादेशों का पुन: प्रक्षेपण संविधान के साथ धोखे जैसा है, और या ‘कानून का समांतर स्रोत’ नहीं बन सकता है। अपने 15 अगस्त के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जब तक उन्हें (मुस्लिम महिलाओं) को न्याय नहीं मिलता, तब तक वह रुकने वाले नहीं हैं। अध्यादेश को पीएम ‘वादा पूरा करना’ के तौर पर भी लिया जा सकता है। इसके साथ इस अध्यादेश को 6 महीने के भीतर पास कराना होगा। इसका मतलब है कि इस अध्यादेश को मार्च 2019 के मध्य तक पास कराना होगा। यह वही समय है, जब पीएम मोदी चुनाव की तैयारी में लगे होंगे।

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