राजपथ से राजघाट तक… पहले मिले शैतान, फिर फरिश्ता

नई दिल्ली

राजपथ पर आधी रात को तेज रफ्तार कार ने बुजुर्ग महिला को कुचल दिया। अस्पताल ले जाने की बात कहकर कार ड्राइवर ने जख्मी महिला और उसकी मुंहबोली बेटी को बिठा लिया, लेकिन राजघाट के पास उन्हें सड़क पर फेंककर भाग गया। बाद में, एक बाइक सवार की मदद से महिला अस्पताल तक पहुंची, लेकिन 36 घंटे बाद भी उन्हें होश नहीं आया है।

चारों तरफ CCTV, फिर भी पुलिस के हाथ खाली
राजपथ पर महिला को कुचलने वाली कार राष्ट्रपति भवन की ओर से आई थी। चारों तरफ CCTV कैमरे होने के बावजूद 36 घंटों बाद भी पुलिस कार का पता नहीं लगा सकी है। इस हादसे में घायल 60 वर्षीय महिला दुर्गी फिलहाल LNJP में भर्ती है, जिन्हें अब तक होश नहीं आया है।

हादसे की चश्मदीद और घायल की मुंहबोली बेटी 40 वर्षीय मंजू है। उसने बताया कि गुरुवार रात 11 बजे के करीब वे भुट्टे बेच रहे थे। तभी दुर्गी को कार ने कुचला। अस्पताल पहुंचाने के नाम पर कारसवार लोगों ने उसे कार में डाला। मंजू को बिठाने को तैयार ही नहीं थे, लेकिन वह जबरन बैठ गईं। कार में हाईफाई दिख रहीं दो लेडीज और दो जेंट्स थे, जो इंग्लिश में बात कर रहे थे। जब वे अस्पताल के बजाय कहीं और जाने लगे मंजू ने मैंने 100 नंबर डायल करना चाहा लेकिन उन्होंने मोबाइल पटक दिया और धमकाया कि अंजाम बुरा होगा। मंजू को लगा कि ये मर्डर भी कर सकते हैं। फिर रात 12 बजे राजघाट के पास फेंक दिया और फरार हो गए।

हादसा या हत्या की कोशिश?
राजपथ पर कार सवार राजघाट के पास सूनसान रोड पर घायल महिला और उसकी मुंहबोली बेटी को फेंककर भाग गए। अंधेरे में गाड़ियां गुजरती रहीं, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।

लेकिन मरी नहीं है इंसानियत
बेटी को परेशान देख आधे घंटे बाद एक बाइकसवार रुका, उसने पुलिस को कॉल की। पुलिस ने फिर घायल को अस्पताल पहुंचाया। हालांकि थाने में हादसे का केस ही दर्ज हुआ है।

‘अम्मा जिंदा हैं या मर गईं पता नहीं था, कार की फोटो खींच ली’
मंजू ने कहा, ‘सूनसान रोड पर डर लग रह था। अंधेरा था। मुझे यह भी नहीं अंदाजा था कि अम्मा मर गईं या जिंदा हैं। बस हिम्मत करके कार की फोटो खींच ली। आधे घंटे तक डरी-सहमी कांपती रहीं। गाड़ियां गुजरती रहीं। आधे घंटे बाद एक बाइक की लाइट दूर से आती दिखाई दी तो हाथ जोड़कर जैसे-तैसे रुकवाया। बाइक सवार ने मदद की और पीसीआर को कॉल की।’ भोपाल की मंजू 25 साल से ली मेरिडियन होटल के पीछे बनी झुग्गियों में परिवार के साथ रहती हैं। घायल बुजुर्ग दुर्गी मंजू के पड़ोस में रहती हैं। दोनों रोज सुबह साथ में आती हैं और इंडिया गेट से आधी रात को घर लौटती हैं।

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