Tuesday , September 22 2020

हमें सैनिकों पर गर्व, मनाएंगे ‘सर्जिकल स्ट्राइक डे’: JNU

नई दिल्ली

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उस सर्कुलर का स्वागत किया जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से 29 सितंबर को ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ मनाने को कहा गया है। उधर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने कहा कि वह सोमवार को कार्यक्रम को अंतिम रूप देगा। बता दें कि यूजीसी द्वारा गुरुवार को जारी सर्कुलर ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि वह राज्य में इस सर्कुलर का पालन नहीं करेगी। तृणमूल और कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह कदम बीजेपी के राजनीतिक अजेंडे का हिस्सा है। हालांकि, केंद्र ने इसे देशभक्ति बताया है।

जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार ने इस सर्कुलर का स्वागत किया। उन्होंने टि्वटर पर पोस्ट किया, ‘विश्वविद्यालयों द्वारा 29 सितंबर 2018 को ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ मनाना सैन्य बलों को के प्रति अपना सम्मान दिखाने के लिए स्वागत योग्य कदम है। जेएनयू को अपने रक्षा बलों पर गर्व है क्योंकि भारत के छह प्रमुख रक्षा संस्थानों से ग्रैेजुएट अधिकारी हमारे पूर्व छात्र हैं।’

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एक प्रवक्ता ने कहा कि कार्यक्रम को सोमवार को अंतिम रूप दिया जाएगा। उधर, दिल्ली विश्वविद्यालय के सूत्रों ने कहा कि उन्हें गुरुवार को देर से सर्कुलर प्राप्त हुआ और शुक्रवार को राजपत्रित अवकाश होने के कारण इस पर कदम उठाने के लिए सोमवार को फैसला किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि सर्जिकल स्ट्राइक की सालगिरह पर विश्वविद्यालयों को जारी यूजीसी के संवाद पर विवाद पैदा हो गया है। जिस पर सरकार ने सफाई पेश करते हुए कहा कि इसमें कोई राजनीति नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति से जुड़ा है और इसका आयोजन संस्थानों के लिए अनिवार्य नहीं है। विपक्षी दलों द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण करने के आरोप को मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आलोचना पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत है।

जावड़ेकर संवाददाताओं से कहा कि बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस से अलग मत रखती है क्योंकि वह कार्यक्रमों का पालन करने के लिए संस्थानाओं को सिर्फ सलाह देती है जबकि कांग्रेस जब सत्ता में थी तब वह निर्णय के पालन को अनिवार्य बनाती थी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम आयोजित करना संस्थानों के लिए अनिवार्य नहीं है, यह उनकी इच्छा पर निर्भर करता है।

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