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2019: कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी पर फंसा पेच

नई दिल्ली

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा है। हालांकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) अभी इस पर साफ-साफ कुछ भी बोलने से बच रही है। जब पार्टी नेताओं से पूछा गया कि क्या कन्हैया 2019 में बेगूसराय से चुनाव लड़ सकते हैं, तो उनका कहना था कि इस मुद्दे पर केवल पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ही फैसला ले सकती है।

बेगूसराय से चुनाव लड़ेंगे कन्हैया!
सियासी गलियारे में सुगबुगाहट है कि कन्हैया बीजेपी के खिलाफ विपक्ष के सर्वसम्मत उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं। हालांकि सीपीआई के सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में पूरी प्रक्रिया के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। एक सूत्र ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि विधानसभा की सीटों पर राज्य इकाई फैसला लेती है, जबकि लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के चयन का फैसला राष्ट्रीय कार्यकारिणी करती है। इसके लिए पहले राज्य इकाई उम्मीदवारों के नाम की सिफारिश भेजती है। एक वरिष्ठ नेता का कहना है, ‘यह कहना अभी बहुत जल्दबाजी होगी कि कि कन्हैया कुमार बेगूसराय से चुनाव लड़ेंगे।’

आरजेडी भी उम्मीदवारी पर तैयार
सीपीआई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मध्य नवंबर में बैठक होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से इस संबंध में बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी थी। माना जा रहा है बेगूसराय सीट सीपीआई के लिए खाली करने पर संभावित महागठबंधन के बीच एक व्यापक सहमति बन चुकी है।

कौन हैं कन्हैया कुमार?
बेगूसराय के रहने वाले कन्हैया कुमार के पिता एक किसान हैं, वहीं उनकी मां एक आंगनबाड़ी वर्कर हैं। इससे पहले जब कन्हैया से पूछा गया था कि क्या वह चुनाव लड़ेंगे तो उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी की तरफ से उन्हें चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया जाता है, तो वह इसे नहीं ठुकराएंगे।

फरवरी 2016 में जेएनयू छात्रसंघ के तत्कालीन अध्यक्ष कन्हैया कुमार उस वक्त चर्चा में आए थे, जब जेएनयू में एक समारोह के दौरान छात्रों के एक समूह ने कथित रूप से देश विरोधी नारे लगाए थे। यूनिवर्सिटी की उच्च स्तरीय जांच में कन्हैया के अलावा छात्र उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को दोषी माना गया था। इसके बाद यूनिवर्सिटी पैनल ने उन पर जुर्माना भी लगाया था। हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने पैनल के फैसले को गलत ठहराया था।

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