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70 हजार कर्मियों से ओवरटाइम वापस लेगा SBI

नई दिल्ली

देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने 70,000 कर्मचारियों से वह रकम वापस करने को कहा है जो उन्हें नोटबंदी के दौरान ओवरटाइम सर्विस देने के एवज में दी गई थी। ये 70,000 कर्मचारी उन पांच सहायक बैंकों के हैं जिनका विलय अब एसबीआई में हो चुका है। हालांकि, एसबीआई का कहना है कि उसने जब ओवरटाइम पेमेंट का फैसला लिया था तब उन बैंकों का विलय नहीं हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि एसबीआई ने अपने आंतरिक सर्कुलर में कहा है कि उन कर्मचारियों के लिए ओवरटाइम कॉम्पनसेशन तय हुआ था जो नोटबंदी के वक्त एसबीआई की शाखाओं में कार्यरत थे। ध्यान रहे कि स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर एवं स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर ऐंड जयपुर का एसबीआई में विलय 1 अप्रैल 2017 को हुआ था जबकि नोटबंदी का ऐलान 8 नवंबर 2016 को ही हुआ था।

एसबीआई ने 14 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 की अवधि में शाम 7 बजे के बाद भी काम करने वाले बैंक कर्मचारियों को उनके पद के अनुसार मार्च से मई 2017 के बीच ओवरटाइम कॉम्पनसेशन जारी कर दिया गया था। अब जब पूर्व के असोसिएट बैंकों के कर्मचारियों से पैसे वापस दिए जाने को कहा गया है तो वे अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें मुआवजा मिले साल बीत गया है। एक एंप्लॉयी ने कहा कि आम तौर पर विलय का मतलब संपत्तियों और देनदारियों का उत्तरदायित्व हाथ में लेना होता है। जब ओवरटाइम काम करने के लिए स्टाफ को पैसे दिए जाने की जिम्मेदारी है तो एसबीआई इससे पीछे कैसे हट सकता है?

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