Thursday , October 22 2020

shaheen bagh के प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने समझाया प्रोटेस्ट और चिंता की वो बात

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शन के अधिकार और लोगों के सड़क के इस्तेमाल के मामले में संतुलन बनाना जरूरी है। प्रदर्शन और इस दौरान सड़क को ब्लॉक करने के मामले में संतुलन की अनिवार्यता है। प्रदर्शन के अधिकार के लिए कोई निश्चित नीति नहीं है। इस पर कोई भी रोक केस के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शन के अधिकार और सड़क जाम की स्थिति में संतुलन बनाना होगा। हम इस मुद्दे को देखेंगे। संसदीय लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार है। यह संसद में हो सकता है और सड़क पर हो सकता है लेकिन सड़क पर शांतिपूर्ण ही होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल की अगुवाई वाली बेंच ने फैसला सुरक्षित रखते हुए टिप्पणी में कहा कि प्रदर्शन करने का अधिकार और लोगों के सड़क पर चलने के अधिकार में संतुलन बनाने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर शाहीनबाग में होने वाले प्रदर्शनकारी को हटाने की मांग की गई थी और कहा गया था कि उन्हें सड़क से हटाया जाए या फिर कहीं और प्रदर्शन के लिए उन्हें जगह देकर वहां शिफ्ट किया जाए। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने वाले ऐडवोकेट अमित साहनी ने कहा कि इस तरह से प्रदर्शन की इजाजत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कल ही हरियाणा में चक्का जाम किया गया है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राइट टु प्रोटेस्ट और लोगों के रास्ते के इस्तेमाल को लेकर संतुलन की जरूरत है। लंबे समय तक सड़क को ब्लॉक किया गया था। और ऐसे में सड़क इस्तेमाल करने वालों के अधिकार का क्या हुआ? इस दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से दखल देने वाले महमूद पराचा ने कहा कि मामले में यूनिवर्सल नियम का पालन होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा कि ऐसा कोई यूनिवर्सल नियम नहीं है। संसदीय लोकतंत्र में बहस की पूरी जगह होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है लेकिन वाजिब रोक भी है। 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन करना लोगों का मौलिक अधिकार है लेकिन पब्लिक रोड को ब्ल़ॉक करना चिंता की बात है और एक संतुलन की जरूरत है।

शाहीनबाग में पब्लिक प्लेस और सड़क पर होने वाले प्रदर्शन के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उक्त टिप्पणी की थी और सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन से कहा था कि वह मामले में प्रदर्शनकारियों से बात करें। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि इस तरह अगर सड़कों पर लोग प्रदर्शन को उतारू हो गए तो फिर अराजकता सी स्थिति बनेगी। लोकतंत्र में विचार अभिव्यक्ति का अधिकार है लेकिन इसके लिए जगह कौन सी हो ये महत्वपूर्ण है। पब्लिक प्लेस पर कोई प्रदर्शन कैसे कर सकता है इसपर एक सीमा तय होनी चाहिए। अदालत ने संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन से कहा था कि वह प्रदर्शन कारियों से बात करें और वैकल्पिक जगह पर प्रदर्शन के बारे में बात करें।

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