Wednesday , October 28 2020

SC में हलफनामा, ‘हिंदू आतंक’ या ‘भगवा आतंक’ पर आपत्ति क्यों नहीं?

नई दिल्ली,

‘यूपीएससी जिहाद’ वाले कार्यक्रम को लेकर निजी न्यूज चैनल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया है कि वह टेलिकास्टिंग को लेकर सभी नियमों का पालन करेगा. हालांकि चैनल की ओर से ये भी कहा गया कि दूसरे चैनलों में भी हिंदू आतंक या भगवा आतंक पर कार्यक्रम हुए जो प्रख्यात पत्रकारों ने किए लेकिन उनपर कोई आपत्ति नहीं जताई गई. हलफनामे में प्रोगाम के कैप्शन (‘हिंदू’ टेरर: मिथक या सच?) और मोंटाज की फोटो (जिसमें एक हिंदू संत को तिलक, त्रिशूल और चिलम के साथ दिखाया गया था) भी संलग्न की गई है. इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर यानी सोमवार को होगी.

सुप्रीम कोर्ट में निजी न्यूज चैनल के कार्यक्रम के खिलाफ शिकायत की सुनवाई चल रही है. कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया है कि वह ‘प्रशासनिक सेवा में मुस्लिमों की घुसपैठ की साजिश’ का बड़ा खुलासा करेगा. न्यूज चैनल ने कहा है कि ‘यूपीएससी जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया गया है क्योंकि विभिन्न स्रोतों से जानकारी मिली है कि जकात फाउंडेशन को आतंकवाद से संबंध रखने वाले विभिन्न संगठनों से धन मिला.”

चैनल ने अपने जवाब में कहा, “ऐसा नहीं है कि जकात फांउडेशन को मिले सभी चंदों का संबंध आतंकवाद से है. हालांकि, कुछ चंदा ऐसे संगठनों से मिला है, जो चरमपंथी समूहों का वित्तपोषण करते हैं. जकात फाउंडेशन को मिले धन का इस्तेमाल आईएएस, आईपीएस या यूपीएससी आकांक्षियों की मदद के लिए किया जाता है.”

इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने गैर सरकारी संगठन ‘जकात फाउंडेशन’ से पूछा था कि क्या वह इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहता है, क्योंकि इसमें उसकी भारतीय शाखा पर विदेश से आतंकी संगठनों से वित्तीय मदद मिलने का आरोप लगा है.

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ के समक्ष जकात फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगडे ने कहा कि निजी न्यूज चैनल द्वारा दाखिल हलफनामे में उनके मुवक्किल पर विदेश से चंदा लेने का आरोप लगाया गया है. उनका मुवक्किल एक धर्मार्थ संगठन है, जो गैर-मुस्लिमों की भी मदद कर रहा है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने निजी न्यूज चैनल के वकील से कहा कि हम सेंसरशिप नहीं करना चाहते. हम सेंसर बोर्ड नहीं हैं. हम चाहते हैं कि चैनल हमारे पास आए और हमें बताए कि वह हमारी आशंकाओं को कैसे स्वीकार करना चाहता है. जब हम मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, तो इस संदेश को मीडिया में जाने दें कि किसी भी समुदाय को निशाना नहीं बनना चाहिए. अंतत: हम सभी एक राष्ट्र के रूप में विद्यमान हैं. हर समुदाय के साथ सामंजस्य होना चाहिए.
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