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45 साल पहले भारत के खिलाफ गुब्बारे वाली जासूसी कर चुका है चीन, इस बार बैलून फूटा तो ड्रैगन की खुली पोल

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नई दिल्‍ली

चीन का झूठ पकड़ा गया है। उसके ‘जासूसी गुब्‍बारों’ की पोल दुनिया के सामने आ चुकी है। अमेरिका के लड़ाकू विमान ने शनिवार को कनाडा के आसमान में उड़ रहे चीन के एक ‘स्‍पाय बैलून’ को मार गिराया। इसके एक दिन पहले अलास्‍का समुद्री क्षेत्र में ‘जासूस गुब्‍बारे’ के साथ यही किया गया था। दक्षिण कैरोलिना के तट पर भी अमेरिकी सेना ने ऐसे एक गुब्‍बारे को निशाना बनाया था। चीन के प्रेसीडेंट शी जिनपिंग भले बैलून मिशन से किनारा कर रहे हों, लेकिन सच यही है कि ड्रैगन का यह खेल पुराना है। ऐसे गुब्‍बारों का इस्‍तेमाल भारत में भी जासूसी के लिए किया जा चुका है। जुलाई 1978 में चीन के एक बैलून को भारत में जासूसी और निगरानी करते स्‍पॉट किया गया था।

चीन और अमेरिका के रिश्‍ते लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अब चीन के जासूस गुब्‍बारों का मसला सामने आ गया है। अमेरिका ने चीन पर इन गुब्‍बारों के जरिये जासूसी का आरोप लगाया है। ऐसे गुब्‍बारों से जासूसी का तरीका नया नहीं है। चीन यह हथकंडा भारत पर भी आजमा चुका है। 1978 की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र भी मिलता है। अमेरिका की फॉरेन ब्रॉडकास्‍ट इनफॉरमेशन सर्विस (FBIS) ने नेशनल हेराल्‍ड की एक न्‍यूज रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत में चीनी गुब्‍बारे के स्‍पॉट किए जाने के बारे में बताया था। एफबीआईएस अब खत्‍म हो चुकी है। इस गुब्‍बारे ने भारत में रंगा गांव के पास लीफलेट गिराए थे। अखबार ने इस बात का उल्‍लेख किया था कि यह पहली बार नहीं है जब चीनी गुब्‍बारे ने ऐसा किया हो। इसके हफ्तेभर पहले ऐसे एक गुब्‍बारे ने जासूसी के लिए रेडियो और लीफलेट गिराए थे। इन्‍हें इलाहाबाद से 50 किमी दूर पर गिराया गया था।

क्‍या करता था FBIS?
कभी FBIS अमेरिकी खुफिया जानकारी के लिए ओपन-सोर्स मीडिया रिपोर्ट्स की निगरानी करता था। 1978 की रिपोर्ट बताती है कि चीन जासूसी गुब्‍बारों का इस्‍तेमाल करता आया है। चीन की यह हरकत नई नहीं है। कनाडा और अमेरिका ने दो अलग-अलग मामलों में अजीब आकृतियों के दो ऑब्‍जेक्‍ट्स मार गिराए हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ये चीन के बैलून प्रोग्राम का हिस्‍सा थे या नहीं। हालांकि, यह तय है कि इसके कारण आगे चलकर अमेरिका और चीन के बीच जारी तनाव बढ़ने वाला है। इस साल नई दिल्‍ली में जी-20 सम्‍मेलन के दौरान शी और जो बाइडन की आमने-सामने बैठक हो सकती है। दोनों इस मसले पर बातचीत कर सकते हैं।

चीनी गुब्‍बारों पर कैसे मच गया है हंगामा?
अमेरिका के एफ-22 लड़ाकू विमान ने शनिवार को अज्ञात सीलिंडरनुमा आकृति वाली वस्तु को मार गिराया था। यह कनाडा के आसमान में उड़ रहा था। इसके एक दिन पहले यानी शुक्रवार को ऐसी ही वस्तु को अलास्का समुद्री क्षेत्र के पास मार गिराया गया था। एक हफ्ते पहले अमेरिकी सेना ने चीनी जासूसी बैलून को दक्षिण कैरोलिना के तट पर मार गिराया था। राष्ट्रपति जो बाइडन और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बीच फोन पर बातचीत के बाद इसे मार गिराने का फैसला किया गया। अमेरिका में इसे लेकर काफी हल्‍ला मच गया है। कहा जा रहा है कि इस घटना के बाद चीन की पोल खुल गई है। उसका झूठ पकड़ा गया है।

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