नई दिल्ली,
पूर्वोतर राज्य मणिपुर से दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर परेड कराने का वीडियो सामने आया है. वायरल वीडियो में एक समुदाय की दो महिलाओ को निर्वस्त्र कर ले जाती हुई भीड़ दिखाई दे रही है. मणिपुर पुलिस के मुताबिक ये वीडियो 4 मई का है. वीडियो के वायरल होने के बाद से ही सोशल मीडिया यूजर्स अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. वहीं, विपक्ष सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी से इस्तीफा की मांग कर रहे हैं.
वहीं, जर्मनी के वाइस चांसलर ने भी मणिपुर में जारी हिंसा पर टिप्पणी की है. जर्मनी की यह टिप्पणी इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि हाल ही में मणिपुर की स्थिति को लेकर यूरोपीय यूनियन की संसद में भी चर्चा की गई थी.
यूरोपीय संसद ने मणिपुर हिंसा को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की थी. ब्रसेल्स स्थित यूरोपीय संसद में 12 जुलाई को छह संसदीय दलों ने एक प्रस्ताव पेश किया था जिसमें मणिपुर हिंसा नहीं रोक पाने के लिए मोदी सरकार और उनकी पार्टी बीजेपी की आलोचना की गई थी. प्रस्ताव में भारत सरकार से आग्रह किया गया था कि शांति स्थापित करने के लिए सरकार तुरंत जरूरी कदम उठाए.
मणिपुर हिंसा पर चर्चा नहींः जर्मन वाइस चांसलर
जर्मनी के वाइस चांसलर रॉबर्ट हैबेक से जब पूछा गया, ” क्या भारत से मणिपुर में जारी हिंसा की स्थिति को लेकर चर्चा होगी? हाल ही में यूरोपीय संसद में भी मणिपुर की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की गई थी.” इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बातचीत के लिए इस मुद्दे को टेबल नहीं किया गया है, मैं आर्थिक, ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा मामलों पर चर्चा कर रहा हूं.” हैबेक ने यह बयान आज सुबह यानी गुरुवार को दिल्ली पहुंचने के बाद प्रेस से बातचीत में दिया है. जर्मनी के वाइस चांसलर और आर्थिक मामलों एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री रॉबर्ट हैबेक अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर गुरुवार को भारत पहुंचे हैं.
अमेरिकी राजदूत ने भी मणिपुर हिंसा पर की थी टिप्पणी
भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने भी मणिपुर हिंसा पर कुछ दिन पहले टिप्पणी की थी. इसी महीने कोलकाता में अमेरिकन सेंटर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए अमेरिकी राजदूत ने कहा था कि यह कोई राजनीतिक समस्या नहीं बल्कि एक मानवीय समस्या है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा था, ‘हम मणिपुर में शांति के लिए प्रार्थना करते हैं. मुझे नहीं लगता कि जब हम बच्चों और लोगों को हिंसा में मरते देख रहे हैं तो हमें इसकी चिंता करने के लिए भारतीय होने की जरूरत है. अगर हमसे मदद मांगी गई तो हम हर तरह से मदद के लिए तैयार हैं. हम जानते हैं कि यह भारत का मसला है. हम शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और उम्मीद हैं जल्द ही शांति कायम होगी. ‘
79 दिन से हिंसा की आग में झुलस रहा मणिपुर
मणिपुर हिंसा 3 मई को उस वक्त भड़की जब प्रदेश की बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के खिलाफ अल्पसंख्यक कुकी आदि जनजाती समुदायों ने एक रैली निकाली थी. यह रैली हिंसक हो गई और मैतेई समुदाय पर हमले किए गए. बदले में मैतेई समुदाय ने भी कुकी समुदाय पर हमले शुरू कर दिए और उनके इलाके में रह रहे कुकी लोगों पर हमले होने लगे. उनके घरों को जला दिया गया. उधर, कुकी लोगों ने भी अपने इलाके में रह रहे मैतेई लोगों पर हमले शुरू कर दिए.
